नौ महीने तक गर्भ में वह इस आस में पला कि जल्द ही दुनिया में आकर किलकारी भरेगा, लेकिन दुनिया में आते ही उसे झाड़ियों में फेंक दिया गया। मंगलवार को दो दिन का यह नवजात इंटौंजा के नौवाका पुरवा के पास पाया गया। इसे राजकीय बालगृह शिशु में आश्रय दिलाया गया।
लॉकडाउन के दौरान ढाई से 15 साल तक के 38 बच्चे चाइल्ड लाइन पहुंचे हैं। किसी नवजात के मिलने का यह पहला मामला है। इटौंजा में मंगलवार सुबह माल रोड पर सड़क किनारे ग्रामीणों को बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। मौके पर गए तो झाड़ियों में नवजात को पड़ा देख पुलिस को सूचना दी।
पुलिस उसे सीएचसी इटौंजा ले गई, जहां डॉक्टर ने बच्चे को स्वस्थ व लगभग दो दिन का बताया। प्रभारी निरीक्षक नंदकिशोर के मुताबिक चाइल्ड हेल्पलाइन की सदस्य अनीता त्रिपाठी की मौजूदगी में नवजात को एसडीएम बीकेटी डॉ. संतोष कुमार के सामने प्रस्तुत किया गया।
एसडीएम के निर्देश पर एंबुलेंस से झलकारी बाई महिला चिकित्सालय भेजा गया। चाइल्ड लाइन के परामर्शदाता कृष्णा प्रताप शर्मा ने बताया कि चाइल्ड लाइन सदस्य अनीता त्रिपाठी, ब्रिजेन्द्र शर्मा बच्चे को लेकर झलकारी बाई चिकित्सालय पहुंची। वहां जांच के बाद उसे बालकल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति के आदेश पर राजकीय बालगृह शिशु में आश्रय दिलाया गया।