करारी हार के बाद अब विकास कार्यों पर फोकस कर रहे अखिलेश के ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए दो कंपनियां आगे आई हैं।
कुशीनगर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा परियोजना को पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर विकसित करने के लिए दो कंपनियां रिक्वेस्ट फॉर क्वालीफिकेशन (आरएफ क्यू) स्तर पर पात्र पाई गई हैं।
अब इन्हें रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी किया जाएगा। बुधवार को अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त आलोक रंजन की अध्यक्षता में बिड मूल्यांकन समिति की बैठक हुई।
इसमें आरएफक्यू स्तर पर पटेल इंजीनियरिंग सहित दो कंपनियों के आवेदन सही पाए गए हैं।
पहले कंपनियां नहीं थी राजी
आलोक रंजन ने बताया कि पहली बार कोई कंपनी आगे नहीं आई थी। अब आगे आई दोनों कंपनियों के प्रस्ताव उचित पाए गए हैं। आरएफपी का मसौदा कैबिनेट से अप्रूव्ड है। अब इन्हें आरएफपी मसौदा जारी किया जाएगा जिसके आधार पर तकनीकी व वित्तीय बिड की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।
इसके बाद डवलपर का चयन करके इस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का कार्य शुरू कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि पीपीपी मॉडल पर होने वाले निर्माण में लगभग 354 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
इस एयरपोर्ट के बनने से जापान व कोरिया सहित कई देशों के पर्यटक सीधे कुशीनगर पहुंच सकेंगे। इससे पूर्वांचल में औद्योगिक विकास को बढ़ावा भी मिलेगा।
3200 मीटर लंबा रनवे बनेगा
कुशीनगर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा न होने से क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या नहीं बढ़ पा रही है। प्रदेश सरकार ने इस समस्या को दूर करने के लिए इस हवाई अड्डे का विस्तार कर वहां 3200 मीटर लंबा रनवे भी बनाने का फैसला किया है।
हवाई अड्डा बनने से जापान, कोरिया व यूरोपीय देशों से सीधी उड़ानें यहां आ सकेंगी। हवाई अड्डे के निर्माण के बाद थाईलैंड, श्रीलंका, जापान, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, म्यांमार व ताइवान से हर साल 3.15 लाख से ज्यादा पर्यटक कुशीनगर आएंगे।
इतनी बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने से आवासीय सुविधाओं, यातायात व उद्योग सहित तमाम स्थानीय उद्योगों का विकास होगा। साथ ही नवयुवकों व दक्ष कारीगरों को बड़ी संख्या में रोजगार मिलेगा।