एसएसपी का कहना है कि 5 जनवरी की शाम कन्नौज से आलू से लदी गाड़ियों के साथ शिवेंद्र सिंह, दीपेंद्र, अंकित, प्रदीप बंगाली, जयकुमार तिवारी व संजू कटियार अपने वाहनों से लखनऊ पहुंचे। यहां ये सभी माल एवेन्यू इलाके में लाल बहादुर शास्त्री मार्ग स्थित एक स्थान पर ठहरे।
देर रात काफिला विधान भवन के सामने से आलू बिखेरते हुए 1090 चौराहे तक गया। वहां से आलू लाने वाले दोनों वाहन चालक चंदन और चंद्रशेखर शर्मा अपनी गाड़ी लेकर कन्नौज रवाना हो गए, जबकि अन्य लोग माल एवेन्यू इलाके में रुके।
10 हजार से अधिक मोबाइल नंबर खंगालने पर लगा सुराग
एसएसपी ने बताया कि आलू फेंके जाने के प्रकरण में लापरवाही के चलते पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित करने के साथ मुकदमा दर्ज करके पड़ताल शुरू की गई थी। सीओ हजरतगंज अभय कुमार मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज के साथ 10 हजार से अधिक मोबाइल नंबर खंगाले। फुटेज में नजर आए हाफ डाला के नंबर की आरटीओ के दफ्तर में छानबीन की गई।
उसके मालिक व चालक संतोष पाल के बारे में जानकारी मिली। उसके मोबाइल की लोकेशन पांच जनवरी की रात विधान भवन के पास थी। संतोष को हिरासत में लेकर पूछताछ में खुलासा हुआ कि संदीप उर्फ रिक्की और अंकित सिंह ने गाड़ी बुक की थी।
पकड़े गए संतोष पाल ने कहा कि संदीप व अंकित ने कोल्ड स्टोरेज से आलू लादकर लखनऊ ले जाने के लिए 4000 रुपये में गाड़ी बुक की थी। विधान भवन के सामने से लेकर 1090 चौराहा तक आलू बिखेरकर माल एवेन्यू लौटने पर उसे सिर्फ 1500 रुपये थमाकर चलता कर दिया। अन्य दो वाहन चालकों को भी तय भाड़े से कम रुपये दिए गए।
गाड़ियों से निकला था जत्था
पड़ताल में पता चला कि बड़ी संख्या में कार व मोटरसाइकिलों से नारेबाजी करते निकले लोगों के पीछे चल रहे भार वाहनों से विधान भवन से 1090 चौराहा तक आलू बिखेरे गए थे। एसएसपी ने कहा कि साजिश रचने वाले लोग माल एवेन्यू इलाके में किस मकान में रुके थे तथा साजिश में और कौन लोग शामिल थे, इसकी पड़ताल की जा रही है।
आलू फेंकने के आरोप में गिरफ्तार अंकित सिंह व संतोष पाल को पुलिस ने शनिवार शाम कोर्ट में पेश किया। मजिस्ट्रेट ने पांच वर्ष से कम की सजा वाले संज्ञेय लेकिन जमानती अपराध में दोनों की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए उनकी रिहाई के आदेश दिए।