रायबरेली। मानसून की दस्तक जल्द होने वाली है, लेकिन शहर में नालों की साफ-सफाई का कार्य अधूरा पड़ा है। ऐसे में शहर की ढाई लाख आबादी को पिछले साल की तरह इस साल भी जलभराव की समस्या से जूझना पड़ सकता है। हकीकत ये है कि कहीं पर नाले पट गए हैं तो कहीं पर नालों में झाड़झंखाड़ उग आया है। साथ कहीं पर नालों पर अतिक्रमण कर लिया गया है। ऐसे में बारिश के पानी की निकासी नहीं हो पाती।
जिले की मात्र एक नगर पालिका परिषद रायबरेली में कुल 34 वार्ड हैं। इन वार्डों में बारिश के दौरान पानी निकासी के लिए छोटे-बड़े मिलाकर कुल 99 नासे हैं। हर साल मई माह तक नालों की साफ-सफाई का कार्य पूरा कर लिया जाता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। यह हाल तब है, जब जून का आगाज हो गया है। मानसून भी जल्द आ सकता है। बावजूद नालों की सफाई का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। डिग्री कॉलेज चौराहा, जिला अस्पताल चौराहा, बस स्टेशन, कहारों का अड्डा, मलिकमऊ, मटिहा रोड, राजघाट, इंदिरा नगर समेत अन्य जगहों पर नालों पर अतिक्रमण कर लिया गया है। नाले पटे पड़े हैं। यह सब देखने वाला कोई नहीं है।
शहर की नई सरकार गठित हो गई है। जनता ने शत्रोहन सोनकर को पालिकाध्यक्ष चुना है। शहर की सरकार से जनता ने इस बार अधिक उम्मीदें पाल रखी हैं कि उन्हें इस बार जलभराव से राहत मिलेगी, क्योंकि अब तक हर साल नागरिकों को जलभराव से दो चार होना ही पड़ा है। ऐसे में नए पालिकाध्यक्ष को जनता की कसौटी पर खरा उतरने की भी एक चुनौती है। खासकर नालों पर अतिक्रमण करने वालों से कैसे निपटा जाता है।
नगर निकाय चुनाव से पहले आठ अप्रैल को नगर पालिका के ईओ डॉ. आशीष कुमार सिंह का तबादला गैर जनपद हो गया था। आचार संहिता भी हट गई है। एक माह का समय होने वाला है, लेकिन नियमित ईओ की तैनाती नहीं हो सकी है। नियमित ईओ की तैनाती न होना भी शहर के कार्यों में रोड़ा बन रहा है। मौजूदा समय में अतिरिक्त मजिस्ट्रेट धीरज श्रीवास्तव को प्रभारी अधिशासी अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है।