लखनऊ। 13 साल पुराने मारपीट और जातिसूचक गाली देने के मामले में आरोपी मदन सिंह और बाबू लाल को एससी एसटी कोर्ट की विशेष न्यायाधीश नीतू पाठक ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
वादी मंगलू ने 20 जनवरी 2012 को काकोरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एफआईआर के अनुसार, 3 जनवरी 2012 की शाम गांव के ही मदन सिंह, अमर सिंह, बाबू लाल और बद्री ने पुरानी रंजिश में उन्हें घर में घुसकर पीटा और जातिसूचक गालियां दीं। पुलिस ने विवेचना के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। सुनवाई के दौरान वादी मंगलू की मौत हो गई। उनकी पत्नी मंगला और दूसरी गवाह सुनीत ने कोर्ट में कहा कि उन्हें घटना याद नहीं और उन्होंने कुछ नहीं देखा। कोर्ट ने दोनों आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि सरकारी दस्तावेज को औपचारिक सत्यता मान लेने से अपराध साबित नहीं होता बल्कि असली तथ्यों को चश्मदीद गवाहों से साबित करना पड़ता है, जो अभियोजन नहीं कर पाया।