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UP Politics: यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सीटों को लेकर सपा-कांग्रेस में खींचतान, राजनीतिक बयानों से बढ़ी तल्खी

Fri, 17 Jul 2026 08:55 AM IST
Bhupendra Singh अजीत खरे, अमर उजाला, लखनऊ/नई दिल्ली

सार

यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले सीट बंटवारे को लेकर सपा-कांग्रेस में खींचतान तेज होते दिख रही है। एक तरफ कांग्रेस सम्मानजनक और बराबरी की हिस्सेदारी पर अड़ी है। वहीं सपा का कहना है कि सीट नहीं, जीत की क्षमता आधार बने। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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राहुल गांधी और अखिलेश यादव। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर दबाव की राजनीति तेज होती दिख रही है। दोनों दल सार्वजनिक बयानों के जरिये अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने और बातचीत में बेहतर स्थिति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस गठबंधन में सम्मानजनक और बराबरी की हिस्सेदारी की बात कर रही है, जबकि सपा का जोर इस बात पर है कि सीटों का बंटवारा जीतने की क्षमता के आधार पर होना चाहिए।
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यूपी में विधानसभा चुनाव में अब छह-सात महीने का समय बचा है। कांग्रेस इस बार गठबंधन में 150 से अधिक सीटों पर दावा जता रही है। वहीं, सपा नेतृत्व सीटों की संख्या बताने से बचते हुए कह रहा है कि गठबंधन का आधार केवल वही सीटें होनी चाहिए, जहां जीत की संभावना हो। कांग्रेस यह संदेश भी दे रही है कि उसके साथ गठबंधन होने पर ही विपक्षी वोटों का पूरा लाभमिल सकता है। इसी रणनीति के तहत कांग्रेस बसपा के साथ संभावित गठबंधन के संकेत भी देती रही है। हालांकि, बसपा ने ऐसे किसी संकेत को कभी महत्व नहीं दिया।

बयानों से बढ़ी तल्खी 

हाल ही में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा था कि 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा 120 सीटें भी नहीं जीत पाई थी, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ आने से उसकी सीटों की संख्या बढ़कर 37 हो गई। जवाब में सपा के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन ने कहा कि कुछ लोग बेवजह यान देकर मर्यादा भूल रहे हैं। गठबंधन मजबूत रखना है तो सार्वजनिक रूप से संयम और सौहार्द बनाए रखना चाहिए। इमरान मसूद समय-समय पर सपा पर मुस्लिम समुदाय से जुड़े मुद्दों को पर्याप्त तरीके से न उठाने का आरोप भी लगाते रहे हैं।

छोटे भाई की भूमिका से परहेज

कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने साफ कहा है कि पार्टी विधानसभा चुनाव सम्मान और बराबरी के आधार पर लड़ेगी। राजनीतिक जानकार इसे इस संकेत के रूप में देख रहे हैं कि कांग्रेस इस बार गठबंधन में छोटे भाई की भूमिका स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है। पार्टी सीट बंटवारे में भी इसी आधार पर अपनी हिस्सेदारी तय कराना चाहती है। 

वहीं, सपा नेताओं का कहना है कि 2022 के चुनाव में कांग्रेस को 107 सीटें दी गई थीं, लेकिन वह केवल सात सीटें ही जीत सकी। उनका यह भी कहना है कि जब कांग्रेस ने 2022 में अलग चुनाव लड़ा तो उसे सिर्फ दो सीटें मिलीं। ऐसे में भाजपा को हराने के लिए सीटों की संख्या पर जोर देने के बजाय जीतने की क्षमता को प्राथमिकता होनी चाहिए।
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