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Research: दाहिने कान से कम सुनते हैं ट्रक ड्राइवर, केजीएमयू में 200 चालकों की सुनने की क्षमता पर हुआ अध्ययन

Tue, 25 Mar 2025 06:16 PM IST
भूपेन्द्र सिंह सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ

सार

केजीएमयू में 200 चालकों की सुनने की क्षमता पर साक्षा अध्ययन किया गया। इसमें सामने आया कि  ट्रक ड्राइवर दाहिने कान से कम सुनते हैं। आगे पढ़ें और जानें पूरे तथ्य...
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सुनने में समस्या - फोटो : Freepik.com
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विस्तार
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राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के साझा अध्ययन में हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं। इसमें बताया गया कि लंबे समय तक ट्रक चलाने वाले ड्राइवरों की सुनने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो रही है। ड्राइवरों का दायां कान लगातार खिड़की की ओर रहने से बहरेपन का शिकार हो रहा है। यह अध्ययन मेडनो के नॉयज एंड हेल्थ जर्नल में प्रकाशित हुआ है। 

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इस अध्ययन में एकेटीयू के अनुपम मेहरोत्रा, राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज बांदा के एसपी शुक्ला, आईईटी के अरविंद के शुक्ला, केजीएमयू के मनीष के मनार और शिवेंद्र के सिंह और चंडीगढ़ विश्वविद्यालय उन्नाव कैंपस की मोनिका मेहरोत्रा शामिल रहीं। इसमें 200 ट्रक ड्राइवरों के कानों की प्योर टोन ऑडिटयोमेट्री जांच की गई। इसमें पाया गया कि करीब 50 फीसदी चालकों में सुनने की क्षमता प्रभावित हो चुकी थी। बाएं कान में सुनने की क्षमता का नुकसान 59.5 फीसदी था तो दाएं कान में यह प्रतिशत 73.5 फीसदी तक था। इसके बावजूद इनमें से ज्यादातर ड्राइवरों को खुद के बहरेपन की जानकारी ही नहीं थी। 

133 डेसीबल से ज्यादा का शोर बनाता है बहरा

डॉ. मनीष कुमार मनार ने बताया कि कान में होने वाले इनर हेयर्स (आंतरिक बाल) जन्म के बाद दोबारा नहीं उगते। शोर के स्तर के आधार पर इनमें कंपन होता है। इस वजह से हर बार का शोर इनको कुछ न कुछ नुकसान पहुंचाता है। चूंकि, ये बाल दोबारा नहीं उगते, इसलिए व्यक्ति के पूरे जीवनकाल में शोर झेलने का एक स्तर होता है। 121 डेसीबल प्रति घंटे का शोर व्यक्ति आसानी से झेल सकता है। इससे उसकी सुनने की क्षमता को कोई नुकसान नहीं पहुंचता, लेकिन 133 डेसीबल शोर प्रति घंटा झेलने पर व्यक्ति के सौ फीसदी बहरे होने की आशंका होती है। 

शोर के साथ ही ये कारण भी रहे अहम 

ट्रक ड्राइवरों के सुनने की क्षमता प्रभावित होने के पीछे मुख्य वजह यातायात का शोर है। हालांकि, इसके साथ ही अन्य कारण भी जिम्मेदार हैं। इनमें कम नींद, शराब का सेवन और 40 साल से ज्यादा उम्र होना मुख्य वजह निकलकर आई है। 

जानें कहां होता है कितने डेसीबल शोर 

घर पर :

  • बच्चे का रोना 110, 
  • मिक्सी 90,
  • डोरबेल- 80, 
  • वैक्यूम क्लीनर- 60 से 85, 
  • फ्रिज-50 

कार्यस्थल पर:

  • पांच सौ फीट पर 
  • आर्टिलरी फायर-150, 
  • एयरोप्लेन टेकिंग ऑफ- 140,
  • एंबुलेंस सायरन- 120,
  • क्लब-110,
  • इलेक्ट्रिक ड्रिल- 95, 
  • सामान्य ऑफिसर लाइब्रेरी - 40 

अन्य जगहः

  • हैंडगन- 166, 
  • रायफल-163,
  • पटाखे 150, 
  • डीजे- 120,
  • हेवी ट्रैफिक 85
  • रेजिडेंशियल एरिया 40
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