पारंपरिक लोकनाट्य का मंचन सवेरा फाउंडेशन की ओर से किया गया।
लखनऊ। प्रभु श्रीराम ने जैसे ही शिव धनुष तोड़ा और मां सीता ने वरमाला पहनाई... पूरा प्रेक्षागृह जय सियाराम के जयघोष से गूंज उठा। जनकपुर के दरबार में सजे स्वयंवर के दृश्य और शिव धनुष के टूटते ही गूंजे जयकारों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय कर दिया। मंचन की शुरुआत राजा जनक की व्यथा से हुई। कलाकारों ने शानदार अभिनय से त्रेतायुग को मंच पर जीवंत कर दिया। यह दृश्य गाेमतीनगर सि्थत अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में देखने को मिला। इस पारंपरिक लोकनाट्य का मंचन सवेरा फाउंडेशन की ओर से किया गया। निर्देशक श्रीपाल गौड़ और लेखक श्रद्धेय राजकुमार त्रिपाठी रहे। सुरेश श्रीवास्तव, केके पांडेय, अनूप पांडेय, सत्यार्थ पांडेय, संतोष आदि कलाकारों ने पात्रकों की भूमिका निभाई। संजय त्रिपाठी, शहीर अहमद, रश्मि त्रिपाठी, नवल शुक्ला आदि का कार्यक्रम में योगदान रहा।
पारंपरिक लोकनाट्य का मंचन सवेरा फाउंडेशन की ओर से किया गया।
पारंपरिक लोकनाट्य का मंचन सवेरा फाउंडेशन की ओर से किया गया।
पारंपरिक लोकनाट्य का मंचन सवेरा फाउंडेशन की ओर से किया गया।
पारंपरिक लोकनाट्य का मंचन सवेरा फाउंडेशन की ओर से किया गया।
पारंपरिक लोकनाट्य का मंचन सवेरा फाउंडेशन की ओर से किया गया।
पारंपरिक लोकनाट्य का मंचन सवेरा फाउंडेशन की ओर से किया गया।