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Lucknow News: शताब्दी पुरानी इमारतों में फैला पेड़ों का जाल, डर में जी रहे एक हजार परिवार

Wed, 17 Sep 2025 02:58 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
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कैसरबाग की मछली मंडी में मंगलवार को पुराना पेड़ गिर पड़ा। इसके नीचे कई लोग दब गए। एक की मौत हो
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लखनऊ। कैसरबाग के लाटूश रोड स्थित मछली मंडी के पास ऐसी आधा दर्जन बहुमंजिला जर्जर इमारतें हैं जो शताब्दी पुरानी हैं। इनमें रहे एक हजार परिवार हर समय डर के साए में जीने को विवश हैं। इमारतों में भी करीब सौ से डेढ़ सौ साल पुराने पेड़ लगे हैं। इनकी जड़े लोगों के कमरों की छतों और दीवारों को भेदते हुए बाहर तक निकली हैं, जिस कारण कभी भी कमरे गिर सकते हैं।
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यही नहीं, बाहर से जर्जर इन इमारतों को देख कर इस बात का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि इनमें इतनी बढ़ी संख्या में परिवार रह रहे हैं। इनमें दाखिल होने पर वास्तविकता कुछ और ही नजर आती है। इमारतों के बगल से निकला रास्ता इतना संकरा है कि अगर कभी लोगों के कमरों में आग लग जाए या इमारत ढह जाए तो वे निकल नहीं सकेंगे। आलम यह कि एक बाइक तक इन तंग गलियों से नहीं निकल सकती।

घटना के कारण कमरा किया खाली
कैसरबाग में मंगलवार को हुए हादसे के कारण सड़क की दूसरी ओर स्थित सन 1933 में बनी इमारत में जन्म से रह रहीं पूनम सोनकर ने बताया कि घटना के समय वह परिवार के साथ खाना खा रही थीं, तभी उन्हें धमाका सुनाई पड़ा। वह बाहर निकलीं तो देखा कि मछली मंडी पर पेड़ गिरा पड़ा था। उसके नीचे दबे घायलों को लोग निकाल रहे थे।
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यह दृश्य देखकर दहशत उनमें इस कदर बैठ गई कि आनन-फानन उन्होंने अपने कमरे में रखी गृहस्थी का सामान बाहर निकाल लिया। पूनम ने बताया कि उनके कमरे की छत पर पेड़ों की जड़ें फैली हुई हैं। हर समय कमरा गिरने का भय बना रहता है। पूनम की तरह सोनकी, अनामिका और अन्य महिलाओं ने भी अपने कमरों का सामान निकाल कर बाहर रख लिया।



कई बार कहा, मगर नहीं हुई सुनवाई

यहीं रहने वालीं रंजना सोनकर ने बताया कि पेड़ों की जड़ें उनके पूरे कमरे में फैल चुकी हैं। हर समय यही डर रहता है कि न जाने कब कमरा ढह जाए। रंजना ने बताया कि इमारत में बने कमरों में रहने वालों में से अधिकांश लोग नगर निगम में किराया भी जमा कराते हैं। नगर निगम को लोगों ने कई बार अपनी समस्या बताई, मगर इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया गया।अर्चना ने भी बताया कि उनके व अधिकांश लोगों के कमरों में जड़ें फैली हुई हैं। पेड़ और इमारत जर्जर होने के कारण वह कभी भी ढह सकती है। इमारतों के बगल से निकली गलियां इतनी संकरी हैं कि अगर कोई घटना घट भी जाए तो लोग बच कर निकल नहीं सकेंगे।



हो सकता है इससे भी बड़ा हादसा

अर्चना की पड़ोस में रहने वालीं नीतू सोनकर ने कहा कि उन्हें हमेशा यह डर सताता रहता है कि क्या पता कब पेड़ गिर जाए और जान चली जाए, मगर आज के हादसे से यह डर दहशत में बदल गया है। अगर अब भी नगर निगम ने सुनवाई नहीं कि तो इससे बड़ा हादसा होने में देर नहीं लगेगी।



कटवाए जाएं घरों पर उगे पेड़

पार्षद शफीकुर्रहमान चचा ने महापौर व नगर आयुक्त से मांग की है कि कैसरबाग मछली मंडी के पास कई मकानों पर पेड़ उगे हैं और मकान जर्जर हालत में हैं। ऐसे में फिर दुर्घटना हो सकती है। ऐसे में घरों पर उगे पेड़ कटवाए जाएं।



मुआवजे की उठाई मांग

कांग्रेस पार्षद मुकेश सिंह चौहान ने मृतक के परिजनों को 20 लाख और घायल को पांच लाख की आर्थिक सहायता दिए जाने की मांग की है। पार्षद ने यह भी कहा कि हादसा नगर निगम की लापरवाही से हुआ। उसे शहर के हर इलाके का सर्वे करना चाहिए जिससे जानकारी रहे।




मंडी हटाकर पार्किंग व काॅम्प्लेक्स बनाने की योजना 25 साल से फंसी

लखनऊ। जिस कैसरबाग मछली मंडी में मंगलवार को पीपल का पुराना पेड़ गिरने से हादसा हुआ, वहां भूमिगत पार्किंग और काॅमर्शियल काॅम्प्लेक्स बनाने की योजना करीब 25 साल से फंसी है। दो बार इसके लिए प्रयास हुए, मगर यहां रह रहे लोगों के भारी विरोध के कारण योजना परवान नहीं चढ़ सकी। योजना अगर सफल होती तो पार्किंग की समस्या और जाम से राहत मिलती और वहां काबिज लोगों को मकान और दुकान। योजना सबसे पहले 2002 में तब बनी थी, जब भाजपा सरकार में लालजी टंडन आवास एवं नगर विकास मंत्री थे। तब कैसरबाग सब्जी और मछली मंडी की जमीन पर नगर निगम संकुल नाम से योजना बनाई गई थी। इसके तहत एक ऐसे बहुमंजिला काॅम्प्लेक्स बनाने की योजना थी, जिसमें बेसमेंट में वाहन पार्किंग, उसके बाद मार्केट और उसके ऊपर आवास प्रस्तावित थे, लेकिन यह योजना परवान नहीं चढ़ सकी। इसके बाद 2016 में स्मार्ट सिटी योजना में दोबारा इस पर मंथन हुआ। तब कैसरबाग मछली मंडी की जमीन पर 27 करोड़ खर्च कर भूमिगत पार्किंग की योजना बनाई गई थी। इसे लेकर करीब चार साल पहले जब नगर निगम की टीम जमीन खाली कराने पहुंची तो भारी विरोध हुआ। मामला उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक तक पहुंचा था, जिसके बाद कब्जा खाली कराने का मामला रुक गया था।

स्मार्ट सिटी में जो योजना बनाई गई थी, उसमें कैसरबाग में सब्जी और मछली मंडी की जमीन पर भूमिगत पार्किंग अलग-अलग बननी थी। मछली मंडी की करीब 2000 वर्ग मीटर जमीन पर पार्किग बननी थी और इस पर करीब नौ करोड़ रुपये का खर्च आ रहा था। इस पार्किंग में करीब 150 गाड़ियां खडी होतीं। इसी तरह सब्जी मंडी की करीब 4000 वर्ग मीटर जमीन पर बनने वाली पार्किंग पर करीब 18 करोड़ रुपये का खर्च आता और करीब 250 गाड़ियां खड़ी होतीं।



महापौर और सपा विधायक के समर्थकों के बीच विवाद का वीडियो वायरल

घटना के बाद मौके पर पहुंचीं महापौर सुषमा खर्कवाल और सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा के समर्थकों के बीच बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इस पर महापौर का कहना है कि विधायक से उनकी बहस नहीं हुई। वह मौके पर पहुंचीं तो विधायक वहां मौजूद थे। दोनों ने एक-दूसरे को नमस्ते किया। उधर, लोगों का कहना है कि विधायक और महापौर के समर्थक एक-दूसरे पर विकास कार्यों में लापरवाही और शिकायतें न सुनने के आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे।



कैसरबाग चौराहे पर लगा जाम

हादसे के बाद डिप्टी सीएम और वरिष्ठ अधिकारियों के घटनास्थल पर पहुंचने के दौरान कैसरबाग चौराहे पर जाम लग गया। इसका असर कचहरी से लेकर आसपास के इलाके में भी देखने को मिला। ट्रैफिक पुलिस ने किसी तरह जाम खुलवाकर डिप्टी सीएम और अधिकारियों को निकलवाया। राहत व बचाव कार्य के दौरान लाटूश रोड पर वाहनों का आवागमन रोक दिया दिया। काफी देर बाद यातायात सामान्य हो सका। हादसे में घायल अभिषेक ने बताया कि वह गैस सिलिंडर की डिलीवरी देने बाइक से खंदारी बाजार इलाके में गए थे। इसी बीच गिरे पेड़ की चपेट में आकर घायल हो गए। उनकी बाइक क्षतिग्रस्त हो गई।

कैसरबाग की मछली मंडी में मंगलवार को पुराना पेड़ गिर पड़ा। इसके नीचे कई लोग दब गए। एक की मौत हो

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