लखनऊ। केजीएमयू में असाध्य बीमारी से ग्रस्त मरीज इलाज के लिए भटक रहे हैं। नई व्यवस्था लागू होने से वह कार्ड लेकर एक से दूसरे विभाग भटक रहे हैं। नया कार्ड बनवाने के लिए सारी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद भी आसानी से कार्ड नहीं बन पा रहा है। नतीजतन बड़ी संख्या में गरीब मरीजों का इलाज अटक गया है। इसमें कैंसर जैसी दूसरी गंभीर बीमारी से पीड़ित शामिल हैं।
केजीएमयू में असाध्य योजना के तहत गरीब मरीजों के मुफ्त इलाज का नियम है। इस योजना में करीब ढ़ाई करोड़ रुपये की दवा घोटाले के बाद प्रशासन सख्त हो गया है। घोटाले की वजह से डॉक्टर व कर्मचारी असाध्य योजना के तहत नए मरीजों का पंजीकरण करने से कतरा रहे हैं। मरीजों को टरका रहे हैं। वहीं पुराने मरीजों के कार्ड का नया कार्ड नहीं बन पा रहा है। नतीजतन गरीब मरीज धक्के खा रहे हैं। उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। वार्ड से लेकर मुख्य पीआरओ भवन के बीच मरीज भटक रहे हैं। शुक्रवार को करीब 50 से अधिक असाध्य बीमारी से ग्रस्त मरीज पीआरओ ऑफिस में कार्ड का नवीनीकरण कराने पहुंचे थे। जिन्हें वापस कर दिया गया। जिसके बाद मरीज व तीमारदार चिकित्साधीक्षक से मिलकर गुहार लगाई। चिकित्साधीक्षक डॉ. सुरेश कुमार ने सभी का कार्ड बनाने के निर्देश दिए हैं ताकि मरीजों को इलाज बाधित न हो।
केस-1
उन्नाव निवासी राम चंदर को खून से जुड़ी असाध्य बीमारी है। उनका इलाज हीमैटोलॉजी विभाग से इलाज चल रहा है। दवा के लिए पीआरओ ऑफिस काउंटर पर रुपये डलवाने के लिए पहुंचे। काउंटर पर मौजूद कर्मचारी ने बताया कि कार्ड का नवीनीकरण होगा। जबकि कार्ड 10 अक्तूबर 2025 को बना था। तीन साल कार्ड की वैधता थी। एक साल से कम समय में ही नवीनीकरण का पेंच फंसा दिया गया है। वहीं नवीनीकरण भी नहीं किया जा रहा है।
केस-2
सीतापुर महौली निवासी आयुषी असाध्य बीमारी से ग्रस्त है। केजीएमयू के हीमैटोलॉजी विभाग से इलाज चल रहा है। इनका असाध्य कार्ड मार्च 2026 में बना। इनके कार्ड में भी रुपये नहीं डाले गए। नया कार्ड बनवाने के लिए बोला गया है। कार्ड में रुपये न होने से इलाज बंद हो गया है।
केस-3
महराजगंज निवासी गायत्री का इलाज स्त्री रोग विभाग में चल रहा है। इनका कार्ड जनवरी 2026 में बना था। बेटे सूरज ने बताया कि कार्ड का नवीनीकरण कराने के लिए कहा गया। रोगी कल्याण के दफ्तर भी गए। लेकिन कर्मचारियों ने टरका दिया। इसकी वजह से इलाज अटका है।
केस-4
लखनऊ सदर स्थित दुआ खान को गंभीर बीमारी है। इनका असाध्य कार्ड मार्च 2025 में बना है। परिवारीजनों ने बताया कि बीते कई दिनों से कार्ड में पैसे डलवाने के लिए भटक रहे हैं। लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। सभी टालमटोल कर रहे हैं।
यह है नई व्यवस्था
अभी तक असाध्य कार्ड बनने के बाद इसकी मान्यता तीन साल तक रहती थी। ऐसे में मरीज तीन साल तक बिना किसी अतिरिक्त प्रक्रिया के योजना का लाभ ले सकते थे। वहीं, नई व्यवस्था के अनुसार अब कार्ड की वैधता महज एक साल ही रहेगी। इस कारण मरीजों को अब नया कार्ड बनाने के बाद ही मुफ्त इलाज मिल पाएगा। एक साल की अवधि पूरी होने के बाद मरीजों को नवीनीकरण कराना होगा। इसके लिए उन्हें राशन व आधार कार्ड जैसे दस्तावेज जमा करने होंगे।