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यूपी का संकटः मजबूरी के चलते थैलीसीमिया मरीजों ने किया उत्तराखंड का रुख

Wed, 08 May 2019 01:34 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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यूपी के थैलीसीमिया से पीड़ित मरीज इलाज नहीं मिलने के कारण उत्तराखंड का रुख कर रहे हैं। दरअसल, मुरादाबाद के जिला चिकित्सालय में 60 थैलेसिमिक बच्चे पंजीकृत हैं, लेकिन यहां बजट न होने के कारण पीड़ितों को हल्द्वानी के सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है। 
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हालात ये हैं कि जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक से बच्चों को बिना रक्तदाता के खून भी नहीं दिया जा रहा है, थैलीसीमिया मरीजों को बिना रक्तदाता के नि:शुल्क खून देने का शासनादेश है। 

यूपी के थैलीसीमिया पीड़ितों की संख्या के अनुसार केंद्र सरकार ने 13 जिलों को 5.49 करोड़ रुपये दिए हैं। थैलीसीमिया मरीजों को हर मंडल में सुविधाएं दिलाने में जुटे मानवीर सिंह ने बताया कि चित्रकूट, मुरादाबाद व सहारनपुर सहित आठ मंडल छूट गए हैं। 
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उन्हें भी बजट देने के लिए स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह और एनएचएम निदेशक पंकज कुमार को पत्र लिखा गया है। उन्होंने बताया कि 16 लाख बजट मिलने के बाद भी बुलंदशहर जिला चिकित्सालय में पंजीकृत 16 बच्चों को इलाज नहीं मिल रहा था। 

इसके लिए उन्हें अपनी को इलाज के लिए दिल्ली ले जाना पड़ता था। हर महीने लगभग 10 हजार रुपये खर्च आता था। इस बार बजट में इन सभी चीजों को शामिल किया गया है। इसके बावजूद पीड़ितों को अपने इलाज की सुविधा नहीं मिल रही है।

मुरादाबाद के सीएमएस से इस बारे में पूछताछ की गई तो उन्होंने खून देने की बात कही है। इसके बावजूद इस मामले की जांच कराई जाएगी। यदि बिना डोनर और निशुल्क खून देने के शासनादेश का उल्लंघन मिला तो कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. पद्माकर सिंह, महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य

दो हजार में एक बच्चे को हो सकता है थैलीसीमिया

थैलेसीमिया एक अनुवांशिक बीमारी है। ये माता-पिता से बच्चों को होती है। एक बार थैलेसीमिया बीमारी से पीड़ित बच्चे ने जन्म ले लिया तो उसे जीवित रखने केलिए जीवन भर रक्त चढ़ाना पड़ता है। इस बीमारी का पता खून की एक जांच से हो सकता है। 

यदि माता-पिता इस बीमारी के कैरियर हैं तो बच्चे को भी थैलेसीमिया होने की संभावना होती है। गर्भवती के खून की जांच कर कैरियर होने का पता लगाना चाहिए। यदि जांच में गर्भस्थ शिशु भी बीमारी से ग्रस्त मिलता है तो परिवार को गर्भपात कराने की सलाह दी जाती है।
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तब जरूरी है जांच

  • गर्भधारण करते समय महिला की उम्र 35 साल से अधिक हो
  • परिवार में कोई मंदबुद्धि बच्चा या व्यक्ति हो
  • पहले से किसी को थैलेसीमिया, हीमोफीलिया, मस्क्युलर डिस्ट्राफी बीमारी हो
  • यदि माता-पिता दोनों ही किसी अनुवांशिक बीमारी के वाहक हों
  • गर्भधारण के बाद मिर्गी की दवा खाई हो या फिर कोई संक्रमण हो गया हो
  • परिवार में जन्मजात मृत शिशु पैदा हुआ हो
  • परिवार के एक से अधिक सदस्य एक जैसी ही बीमारी से ग्रस्त हों
  • महिला का पति के परिवार से खून का रिश्ता हो
  • गर्भ की अल्ट्रासाउंड जांच में किसी खराबी का पता चला हो
  • परिवार में पहले किसी बच्चे में पैदाइशी विकृति हो
  • आंत की बनावट में खराबी हो
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