लखनऊ। केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में इलाज कराने आए तो ग्लूकोज की बोतल पकड़ने के लिए एक तीमारदार का होना जरूरी है। यदि आपके साथ एक ही तीमारदार है और वह दवा लेने या पर्ची कटवाने में व्यस्त है तो ग्लूकोज की बोतल खुद मरीज को ही पकड़नी पड़ती है। जांच के लिए भी लंबी लाइन लगानी पड़ती है।
ग्राउंड फ्लोर पर गंभीर मरीजों के लिए एक्सरे, सीटी स्कैन, एमआरआइ व अल्ट्रासाउंड मशीनें लगी हुई हैं। यहां जांच के लिए आए झांसी निवासी शुभम सिंह के पेट में नली लगी है। उनके साथ मौजूद भाई दवा लेने गया था। ऐसे में उन्हें खुद अपने हाथ से ग्लूकोज की बोतल पकड़नी पड़ी। वह एक्सरे कराने के लिए घंटे भर से लाइन में लगे हैं। करीब-करीब यही स्थिति दूसरे मरीजों की भी है। जबकि नियमानुसार ट्रॉमा सेंटर में पेशेंट अटेंडेंट के तौर पर दर्जन भर से ज्यादा कर्मचारी कार्यरत हैं। इस संबंध में मीडिया प्रभारी डॉॅ. सुधीर सिंह का कहना है कि ट्रॉमा में स्ट्रेचर और स्टैंड की कमी नहीं है। मरीज किन परिस्थितियों में ग्लूकोज की बोतल पकड़े हुए हैं, इसे दिखवाया जाएगा।