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Lucknow News: सवाल कई, परिवहन आयुक्त के पास जवाब एक का भी नहीं

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परिवहन विभाग से 320 प्राइवेट कर्मियों को निकालने का मामला
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परिवहन विभाग से 320 प्राइवेट कर्मियों को निकालने का मामला
कर्मचारियों ने कहा, आरोप बेबुनियाद, न हुई शिकायत, न की गई जांच

लखनऊ। परिवहन विभाग से 320 प्राइवेट कर्मचारियों को बाहर निकालने का मुद्दा शनिवार दिनभर सुर्खियों में रहा। दलालों से कर्मियों की सांठगांठ पर जांच नहीं करवाने, स्मार्ट चिप को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई से बचाने, एक दशक तक चुप्पी साधे रहने सहित कई सवाल हैं, लेकिन परिवहन आयुक्त के पास उनके जवाब नहीं हैं। ऐसे में कर्मी मामले को कोर्ट ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।
दरअसल, परिवहन विभाग में ड्राइविंग लाइसेंस बनने से लेकर प्रिंटिंग तक की जिम्मेदारी सेवा प्रदाता कंपनी के पास है। कंपनी प्राइवेट कर्मचारियों से यह काम करवाती है। अभी स्मार्ट चिप कंपनी के पास यह जिम्मेदारी है, जो जल्द ही सिल्वर टच, रोजमार्टा और फ़ोकोम को मिल जाएगी। लखनऊ आरटीओ सहित प्रदेशभर के आरटीओ, एआरटीओ में स्मार्ट चिप के 320 कर्मचारी काम करते हैं। हाल ही में आरटीओ प्रशासन संजय तिवारी ने परिवहन आयुक्त किंजल सिंह को पत्र लिखकर इन कर्मचारियों की दलालों से सांठगांठ होने की बात कही। साथ ही शिकायतें आने का हवाला देकर उन्हें हटाने की मांग की थी। इस पर परिवहन आयुक्त ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए गत दिवस कर्मियों को अप्रत्यक्ष रूप से हटाने के निर्देश जारी कर दिए। उन्होंने सेवा प्रदाता कंपनियों को निर्देश दिए किया कर्मचारियों को रखने से पूर्व उनका पुलिस वेरिफिकेशन करवाएं। उनका जिला बदलें। आरटीओ, एआरटीओ से सकारात्मक रिपोर्ट के बाद ही उन्हें दोबारा तैनाती दें। ऐसे निर्देश देकर कर्मचारियों की दोबारा तैनाती लगभग नामुमकिन कर दी है। वहीं शनिवार को कर्मचारियों ने नाराजगी जताते हुए आरोपों को खारिज किया। साथ ही कई ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब अफसर देने से बच रहे हैं। या यूं कहें कि उनके पास जवाब हैं ही नहीं। परिवहन आयुक्त किंजल सिंह मामले से जुड़े सवालों के जवाब देने से बच रही हैं।
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सवाल 1:दलालों से थी सांठगांठ तो क्यों चुप बैठे रहे अफसर?
-आरटीओ प्रशासन संजय तिवारी ने दलालों से कर्मचारियों की सांठगांठ का आरोप लगाया है। ऐसे में सवाल उठता है कि एक दशक से अधिक तैनात रहे ऐसे कर्मियों पर अफसरों ने कार्रवाई क्यों नहीं की। क्यों अफसर चुप्पी साधे बैठे रहे।

सवाल 2: स्मार्ट चिप पर मेहरबानी, क्यों नहीं किया ब्लैकलिस्ट?
-सेवा प्रदाता कंपनी स्मार्ट चिप ने इन 320 कर्मचारियों की भर्ती की थी, जिनकी दलालों से मिलीभगत बताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि स्मार्ट चिप से इसकी शिकायत क्यों नहीं की गई। अगर आरोप सच हैं तो क्यों स्मार्ट चिप को ब्लैकलिस्ट करने से अफसर बचते रहे।

सवाल 3: किसने, कब और कहां की शिकायतें?
-आरटीओ प्रशासन संजय तिवारी ने दलालों से मिलीभगत की कर्मचारियों की शिकायतों का हवाला परिवहन आयुक्त किंजल सिंह को दिया है। लेकिन यह शिकायतें कहां हैं, किसने और कब कीं, इसका जवाब आरटीओ के पास नहीं है। अगर शिकायतें हुई भी हैं तो उन पर क्या कार्रवाई की गई। सूत्र बताते हैं कि ऐसी शिकायतें हुई ही नहीं हैं, इसलिए उन्हें परिवहन आयुक्त को नहीं भेजा गया है।

सवाल 4: दशक तक भ्रष्ट कर्मियों के साथ क्यों काम करते रहे अफसर?
-परिवहन आयुक्त को भेजे गए पत्र में कर्मचारियों को भ्रष्ट कहा गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि एक दशक तक तैनात ऐसे तथाकथित भ्रष्ट कर्मचारियों के साथ अफसर काम क्यों करते रहे। क्यों नहीं उनके भ्रष्टाचार के खिलाफ अफसर चुप्पी साधे रहे।
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सवाल 5: कितने बाहरी दलाल पकड़े गए, कितनों पर हुई कार्रवाई?
-शिकायत में यह भी कहा गया है कि बाहरी दलाल कर्मचारियों के साथ मिलकर काम कर रहे थे। ऐसे में सवाल उठता है कि कितने बाहरी दलाल पकड़े गए। कितनों के खिलाफ कार्रवाई हुई। सूत्र बताते हैं कि डीएम की कार्रवाई के बाद जिन दलालों के वीडियो बने भी थे, उन पर कार्रवाई की जगह, मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।





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