नाच-गाना उसकी मजबूरी है, वह भी आम लोगों की तरह नौकरी करके पैसे कमाना चाहती थी। शायद अब उसकी ये इच्छा भी पूरी हो सके। जी हां सुधा इग्नू में एडमिशन लेने वाली पहली ट्रांसजेंडर बन गई हैं।
विवि ने किन्नर समुदाय के लिए निशुल्क शिक्षा प्रदान करने की व्यवस्था की है। दावा है कि इग्नू इस तरह की योजना शुरू करने वाला देश का पहला विवि बन गया है।
इस योजना के तहत उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाली सुधा इग्नू की पहली स्टूडेंट बन गई है। सुधा ने बताया कि उसने 18 वर्ष पहले बिहार से इंटर उत्तीर्ण किया था। उच्च शिक्षा ग्रहण करने की काफी इच्छा थी लेकिन सामाजिक परिस्थितियों की वजह से आगे की पढ़ाई नहीं कर पाई।
रोजी-रोटी की तलाश में सुधा लखनऊ आ गई और किन्नर समुदाय के साथ जुड़कर नाच-गाने के कार्यक्रम के जरिए जीविका चलाने लगी। सुधा ने बताया कि वह मजबूरी में यह सब करती थी
लेकिन हमेशा उसके मन में आम लोगों की तरह नौकरी करने की इच्छा थी। इसी दौरान वह इग्नू के संपर्क में आई और सोमवार को उसने इग्नू के क्षेत्रीय केंद्र में स्नातक उपाधि कार्यक्रम (बीपीपी) में अपना नामांकन कराया।
सहायक क्षेत्रीय निदेशक डॉ. कीर्ति विक्रम सिंह ने बताया कि बिजलीपासी राजकीय महाविद्यालय में आयोजित जागरुकता शिविर में सुधा ने नामांकन कराया। यह 6 महीने का कोर्स है। जिसे पूरा करने के बाद सुधा को स्नातक कोर्स में एडमिशन दिया जाएगा। क्योंकि सुधा के इंटर की मार्कशीट व सर्टिफिकेट नहीं था इसलिए उसका बीपीपी में नामांकन कराया गया।
सुधा से प्रेरणा ले रहे हैं अन्य किन्नर
सहायक निदेशक ने बताया कि सुधा बाकी किन्नरों के लिए भी प्रेरणा का श्रोत बन गई है। जागरुकता शिविर में सुधा के साथ कई किन्नरों में भाग लिया था।
उसने सरकार से भी अपेक्षा की है कि ऐसे समुदाय के लोगों के लिए रोजगार के अवसर मिलने चाहिए। इग्नू की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. मनोरमा सिंह ने बताया कि इग्नू अब तक बंदियों को निशुल्क शिक्षा प्रदान कर रहा था, अब इस सत्र से यह सुविधा ट्रांसजेंडर को भी दी जाएगी। वे 31 जुलाई तक नामांकन करा सकते हैं।