सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर्स के हक को मान्यता देते हुए उन्हें मुख्यधारा में शामिल करने के आदेश दिए। उन्हें ‘थर्ड जेंडर’ मानते हुए इसका विकल्प तक स्कूल, कॉलेज में प्रवेश से लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में नौकरी और पहचान पत्र बनाने के आदेश हैं।
इसके बाद भी लखनऊ के स्कूल, कालेजों ने ट्रांसजेंडर्स की एक संस्था को अपने परिसर में ही कार्यशाला करने से मना कर दिया।
सरकारी मदद से ट्रांसजेंडर्स के हित के लिए काम कर रही पहचान संस्था के एक पदाधिकारी दीपक कुलश्रेष्ठ ने बताया कि करीब 15 स्कूल, कॉलेज में हम गए।
हमारा उद्देश्य युवाओं को ट्रांसजेंडर्स की समस्याओं और उनके हक के बारे में बात करना था। हम चाहते थे कि युवा इस समुदाय के लोगों के बारे में जानें। उनके मन में मौजूद गलत तथ्यों को निकालकर ट्रांसजेंडर्स को अपनाने के लिए तैयार किया जाए।