दरअसल, मां सबीना का ब्लड ग्रुप निगेटिव और पिता जमीर अहमद का पॉजीटिव था। ऐसे में बहुत आशंका थी कि गर्भ में पल रहे भ्रूण का ब्लड ग्रुप भी पॉजीटिव हो। ऐसा होने पर भ्रूण का खून मां के निगेटिव खून में मिल जाता और यह भ्रूण में रक्त का संचार रोकने लगता।
धीरे-धीरे भ्रूण का खून कम होने लगता है। यह डॉप्लर अल्ट्रासाउंड से ही पता चल पाता है। यही निगेटिव-पॉजीटिव खून मिलने के कारण ही पांच बार सबीना को गर्भपात हुआ था। ऐसा इस बार न हो, इसीलिए भूण को खून चढ़ाने की जरूरत पड़ी।