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यूपी: डॉक्टरों ने गर्भ में ही ब्लड ट्रांसफ्यूजन कर जुड़वा भ्रूण को चढ़ाया खून, मुस्कुराई जिंदगी

Sat, 13 Jul 2019 04:30 PM IST
ishwar ashish रोली खन्ना/अमर उजाला, लखनऊ
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डॉ. मंदाकिनी प्रधान के साथ सबीना व जमीर। - फोटो : amar ujala
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संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के चिकित्सकों ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए गर्भ में पल रहे जुड़वां भ्रूण में ब्लड ट्रांसफ्यूजन कर न सिर्फ उन्हें नई जिदंगी दी, बल्कि गर्भ में ही पांच बच्चों को खो चुकी मां की गोद में हंसती खिलखिलाती दो बेटियां डाल दीं।

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मैटरनल एंड प्रोडक्टिव हेल्थ डिपार्टमेंट की डॉ. मंदाकिनी प्रधान के नेतृत्व में ब्लड ट्रांसफ्यूजन करने वाली टीम का दावा है कि चिकित्सकीय रिकॉर्ड में अब तक जुड़वां भ्रूण, खासकर एक ही गर्भनाल से जुड़े एक जैसे जुड़वां यानी ‘मोनोकोरियोनिक ट्विन’ को खून नहीं चढ़ाया गया। मेडिकल लिटरेचर में भी इसे लेकर कोई गाइडलाइन नहीं दी गई। जरा सी लापरवाही जच्चा-बच्चा दोनों के लिए घातक हो सकती थी।

डॉ. मंदाकिनी प्रधान ने बताया कि गोंडा की सबीना को 12 हफ्ते की गर्भावस्था में पीजीआई रेफर किया गया था। उसका ब्लड ग्रुप निगेटिव था और भ्रूण में खून की कमी का खतरा था, जिससे उनकी जान जा सकती थी। भ्रूण का वजन 300 ग्राम था, गर्भपात का खतरा ज्यादा था।
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दोनों की गर्भनाल एक होने से यह ध्यान रखना चुनौतीपूर्ण था कि किसे खून चढ़ाया और किसे नहीं। जरा सी चूक से हो सकता था कि एक ही भ्रूण को खून चढ़ा दिया जाए और दूसरा भ्रूण रह जाए। साथ-साथ अल्ट्रासाउंड, भ्रूण की माप करते हुए दोनों में अंतर कर ट्रांसफ्यूजन किया गया। इस केस में डॉ. मंदाकिनी के साथ  डॉ. नीता, डॉ. संगीता और डॉ. श्रुति शामिल रहीं। आठ महीने की गर्भावस्था के बाद सबीना ने दो बेटियों को जन्म दिया। आज वे एक महीने 12 दिन की हो चुकी हैं और पूरी तरह से स्वस्थ हैं।

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आखिर क्यों पड़ी खून चढ़ाने की जरूरत

दरअसल, मां सबीना का ब्लड ग्रुप निगेटिव और पिता जमीर अहमद का पॉजीटिव था। ऐसे में बहुत आशंका थी कि गर्भ में पल रहे भ्रूण का ब्लड ग्रुप भी पॉजीटिव हो। ऐसा होने पर भ्रूण का खून मां के निगेटिव खून में मिल जाता और यह भ्रूण में रक्त का संचार रोकने लगता।

धीरे-धीरे भ्रूण का खून कम होने लगता है। यह डॉप्लर अल्ट्रासाउंड से ही पता चल पाता है। यही निगेटिव-पॉजीटिव खून मिलने के कारण ही पांच बार सबीना को गर्भपात हुआ था। ऐसा इस बार न हो, इसीलिए भूण को खून चढ़ाने की जरूरत पड़ी।
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