मुफ्त यूपीआई पर शुल्क की आहट पर व्यापारी बोले, ग्राहकों पर पड़ेगा बोझ
लखनऊ। बाजार में डिजिटल भुगतान की आदत बना चुका यूपीआई अब शुल्क की चर्चा के कारण व्यापारियों की चिंता बढ़ा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से यूपीआई से भुगतान लेने पर व्यापारियों से एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वसूलने की सिफारिश की गई है। व्यापारियों का कहना है कि शुल्क लगा तो कारोबार की लागत बढ़ेगी और इसका असर आखिरकार ग्राहकों पर पड़ेगा।
2016 में लॉन्च हुए यूपीआई से लेनदेन पर अभी तक कोई शुल्क नहीं लगा है। व्यापारियों के मुताबिक मौजूदा समय में करीब 80 फीसदी कारोबारी लेनदेन यूपीआई से हो रहा है। शेष 20 फीसदी में नकद, डेबिट और क्रेडिट कार्ड से भुगतान शामिल है। डेबिट व क्रेडिट कार्ड से भुगतान लेने पर व्यापारी को दो प्रतिशत शुल्क देना होता था, जिसके चलते कार्ड का इस्तेमाल घटा और यूपीआई का चलन बढ़ा। आशंका है कि यूपीआई पर भी शुल्क लगा तो इसका असर डिजिटल भुगतान पर पड़ेगा।
सरकार की ओर से छोटे दुकानदारों को एमडीआर से बाहर रखने की बात कही जा रही है, लेकिन व्यापारी इसके पक्ष में नहीं हैं। उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष अविनाश त्रिपाठी ने कहा कि खुदरा व्यापार पहले से कमजोर है। सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए, जिससे व्यापारियों की कमाई बढ़े। लखनऊ व्यापार मंडल के अध्यक्ष अमरनाथ मिश्र ने कहा कि यदि दो प्रतिशत तक शुल्क देना पड़ा तो उसका बोझ उत्पादों की कीमत बढ़ाकर ग्राहकों पर डाला जाएगा। शुल्क के कारण व्यापारी यूपीआई के बजाय नकद भुगतान को प्राथमिकता देने के लिए मजबूर हो सकते हैं।