इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि सरकारी कर्मचारियों पर आपराधिक षड्यंत्र, दुष्कर्म, कदाचार, अनुचित लाभ लेने जैसे अपराध का अभियोग चलाने के सरकार से इसकी अनुमति लेना जरूरी नहीं है। इन पर बिना अनुमति लिए मुकदमा चल सकता है। कोर्ट ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197 का संरक्षण, लोक सेवक को पदीय दायित्व निभाने के दौरान हुए अपराधों तक ही प्राप्त है।
यदि सरकार ने अभियोग चलाने की मंजूरी दे दी है तो ऐसे आदेश के खिलाफ अनुच्छेद 226 के तहत याचिका पोषणीय नहीं है। आरोपी को विचारण न्यायलय में अपनी आपत्ति दाखिल करने का अधिकार है। इस अधिकार का इस्तेमाल कोर्ट के आरोप पर संज्ञान लेने के समय या आरोप निर्मित करते समय किया जा सकता है। यहां तक कि अपील पर भी यह आपत्ति की जा सकती है। कोर्ट को सरकार की अभियोजन चलाने की अनुमति की वैधता पर निर्णय लेने का अधिकार है। कोर्ट साक्ष्य के आधार पर देखेगी कि अपराध का संबंध कर्तव्य पालन से जुड़़ा है या नहीं।
यह फैसला न्यायमूर्ति एस पी केशरवानी तथा न्यायमूर्ति आर एन तिलहरी की खंडपीठ ने बेसिक शिक्षा विभाग आगरा के वित्त एवं लेखाधिकारी कन्हैया लाल सारस्वत की याचिका पर दिया है। मामले के अनुसार एक सहायक अध्यापक के खिलाफ शिकायत के बाद जांच जाच बैठाई गई और उसे निलंबित कर दिया गया। तीन माह बाद भी विभागीय जांच पूरी नहीं हुई तो उसने बीएसए को निलंबन भत्ते का भुगतान 75 फीसदी भुगतान करने की अर्जी दी। याची ने आदेश दिलाने के लिए घूस मांगा। अध्यापक ने पचास हजार घूस लेते विजिलेंस टीम से रंगे हाथ पकड़वा दिया ।
विजिलेंस टीम ने अभियोजन की सरकार से अनुमति मांगी। जिसे अस्वीकार करते हुए सरकार ने सीबीसीआई डी को जांच सौपी। उसने चार्जशीट दाखिल की और कोर्ट ने संज्ञान भी ले लिया। इसके बाद सरकार से अभियोजन की अनुमति भी मिल गई। इस आदेश को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने याचिका पोषणीय न मानते हुए खारिज कर दी और कहा कि याची सरकार की अभियोजन की अनुमति आदेश पर विचारण न्यायालय में आपत्ति कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि पद दायित्व निभाने के दौरान हुए अपराध में संरक्षण प्राप्त है कि सरकारी अनुमति से ही अभियोजन चलाया जाए। पदीय कत्तर्व्य से इतर अपराध किया जाता है तो अभियोजन की अनुमति लेना जरूरी नहीं है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को बलिया पहुंचे। सुबह 11:15 बजे पुलिस लाइन परेड ग्राउंड में हेलीकाप्टर से उतरने के बाद उनका अभिनंदन किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री जिला अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने इमरजेंसी वार्ड में स्थापित पोस्ट कोविड वार्ड में भर्ती मरीजों से स्वास्थ्य सुविधाओं और दवा के बारे में पूछताछ की।
मरीजों व तीमारदारों ने बताया कि सब ठीक है। पोस्ट कोविड वार्ड में भर्ती एक मरीज से उन्होंने पूछा कि व्यवस्थाएं आजकल में हुई हैं या पहले से थी। महिला ने बताया कि पहले से थी और दवा भी ठीक-ठाक से मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आप कहीं मत जाइएगा। यहीं पर रहिएगा। आप स्वस्थ होकर यहां से जाइएगा। इस प्रकार अन्य मरीजों से बातचीत की।
सीएम योगी इसके बाद ट्रामा सेंटर स्थित कोविड वैक्सीन सेंटर पर गए। 18 प्लस टीकाकरण में तैनात एएनएम और 45 प्लस में तैनात जीएनएम से बातचीत की। पूछा कि वैक्सीन लगवाने लोग आ रहे या नहीं? एएनएम ने बताया कि लोग वैक्सीन लगवाने आ रहे हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए गठित टीमें काम कर रही हैं।
सीएमएस डॉ बीपी सिंह से पूछा कि जिला अस्पताल में क्या-क्या बन रहा है? सीएमएस ने बताया कि पीकू वार्ड बन रहा है। पोस्ट कोविड वार्ड बनकर तैयार है। इस दौरान मंडलायुक्त आजमगढ़ विजय विश्वास पंत, डीआईजी सुभाष चन्द्र दुबे, डीएम अदिति सिंह, एसपी डॉ विपिन ताडा, मंत्री उपेंद्र तिवारी, जिलाध्यक्ष जय प्रकाश साहू समेत अन्य मौजूद रहे।
बलिया दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को सदर तहसील के हैबतपुर में निगरानी समिति की बैठक ली। सदस्यों से पूछा कि जब आपके गांव में कोरोना संक्रमित मिलता था तब आप हालात किस तरह संभालते थे। इस पर ग्राम प्रधान संजू राय ने कहा कि ग्रामीणों को मास्क लगाने, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने, संक्रमित को क्वारंटीन करने के लिए प्रेरित किया जाता था।
सीएम ने निगरानी समिति के सदस्यों से गांव में दवा वितरण, खाद्यान्न वितरण के अलावा शिक्षा व चिकित्सा की स्थिति की जानकारी ली। इसके पूर्व सीएम ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत पात्र गृहस्थी कार्डधारक गांव की चार महिलाओं और एक पुरुष को खाद्यान्न किट वितरित किया।
फिल्म किस-किस को प्यार करूं की कहानी आपको याद होगी। फिल्म के नायक ने किसी न किसी मजबूरी में आकर चार शादियां की थीं। यह तो हुई रील लाइफ की बात मगर कानपुर के किदवई नगर थाने में पुलिस ने रियल लाइफ में एक बाबा को पकड़ा है जो फिल्म की कहानी से भी दो कदम आगे निकल गया।
छठवीं शादी की कर रहा था तैयारी
किदवई नगर में थाना पुलिस द्वारा पकड़े गये बाबा शाहजहांपुर निवासी अनुज चेतन कठेरिया ने अब तक पांच शादियां कर रखी हैं। अपनी पांचों शादियां छिपाकर अनुज छठवीं करने की तैयारी में था। बाबा अपने मंसूबों में कामयाब होता इसके पहले ही पुलिस ने उसको धर दबोचा।
पांचवी पत्नी के मुकदमे में फंसा बाबा
अनुज ने अपनी चार शादियां छिपाकर श्याम नगर की रहने वाली महिला के साथ में पांचवी शादी की थी। पांचवी पत्नी ने पुलिस को पूरी हकीकत बताते हुए कहा कि अनुज नाम और मजहब बदलकर शादियां करता है। शादी के कुछ दिन बाद ही उसने उत्पीड़न शुरू कर दिया। इस संबध में पांचवी पत्नी ने बीते वर्ष चकेरी थाने में भी मुकदमा लिखाया था। अनुज किदवई नगर क्षेत्र में रहता था तो पांचवी पत्नी ने किदवई नगर थाने में बीती 11 मई को भी 377, 323, 307 धाराओं में मुकदमा लिखाया था।
बना रखा है ट्रस्ट करता है तंत्र-मंत्र
पुलिस ने जब बाबा की कुंडली पढ़नी शुरू की तो पता चला कि अनुज ने शाहजहांपुर के निगोही थाना क्षेत्र में मां कामाख्या, बंजारे बाबा कल्याण सेवा ट्रस्ट के नाम से तंत्र मंत्र का अड्डा बना रखा है। वहां पर अपनी परेशानी लेकर आने वाली युवतियों को जाल में फंसाता है।
शादी डॉट कॉम में बना रखी है प्रोफाइल
अनुज कठेरिया ने शादी डॉट कॉम में भी अपनी प्रोफाइल बना रखी है। इसमें उसने अपना नाम लकी पांडेय बताया है। पुलिस की जांच में पता चला है कि करीब 32 लड़कियों से अनुज चैटिंग करता है। जिसका रिकार्ड भी मिला है। उसमें यह कभी खुद को टीचर बताता है तो किसी को होटल मालिक। आठवीं तक पढ़ा अनुज खुद को बीएससी पास बताता है और अंग्रेजी में चैट करता है।
2005 की थी पहली शादी
अनुज ने वर्ष 2005 में जनपद मैनपुरी की रहने वाली युवती के साथ शादी की थी जिसका कोर्ट में तलाक का मुकदमा चल रहा है। दूसरी शादी जनपद बरेली की युवती के साथ वर्ष 2010 में की थी इसका भी तलाक का मुकदमा चल रहा है। तीसरी शादी अनुज ने वर्ष 2014 में जनपद औरैया की रहने वाली युवती के साथ किया जिसे भी इसने छोड़ दिया। चौथी शादी अनुज ने तीसरी पत्नी की ही कजिन के साथ की जिसने अनुज का सच जानने के बाद सुसाइड कर लिया था। पांचवी शादी अनुज ने कानपुर नगर के श्याम नगर की रहने वाली युवती के साथ वर्ष 2019 में की थी।
छोटे भाई की पत्नी को भी नहीं छोड़ा
अनुज ने अपने छोटे भाई की पत्नी को भी नहीं छोड़ा। छोटे भाई की पत्नी ने शाहजहांपुर के निगोही थाने में वर्ष 2016 में बलात्कार का मुकदमा दर्ज कराया था। अनुज पटेल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। वह अपने तंत्रमंत्र व प्रभाव में लेकर सभी को फंसाता रहा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुकदमों का मैन्युअल दाखिला फिर से शुरू होगा। मुख्य न्यायाधीश ने इसके लिए आदेश जारी कर दिए हैं। अधिवक्ता सात जून को ग्रीष्मावकाश के बाद कोर्ट खुलने के बाद से ही इस बात को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि ई दाखिले में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हाईकोर्ट बार ने भी इस बारे में मांग उठाई थी। इसे देखते हुए मुख्य न्यायाधीश ने 18 जून को जारी आदेश में मैन्युअल दाखिले की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी है। निबंधक प्रोटोकॉल आशीष श्रीवास्तव की ओर से इस आशय की सूचना प्रसारित कर दी गई है।
उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के अधिवक्ता मुकदमों की ई फाइलिंग और वर्चुअल सुनवाई दोनों का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह दोनों व्यवस्था ठीक नहीं है और इससे वादकारियों का काफी नुकसान हो रहा है। वर्चुअल सुनवाई के लिए लिंक न मिल पाने की समस्या है तो ई फाइलिंग में डिफेक्ट आदि को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसे लेकर गत दिनों अधिवक्ताओं के कई प्रतिनिधिमंडलों ने मुख्य न्यायाधीश और महानिबंधक को ज्ञापन भी सौंपा था। हाईकोर्ट के अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव और सुनीता शर्मा ने इस मामले को लेकर सुप्रीमकोर्ट को पत्र भी भेजा था और फिजिकल सुनवाई शुरू करने की मांग की थी। मैन्युअल फाइलिंग का आदेश जारी होने से अधिवक्ताओं ने खुशी जताई है।