लखनऊ। राजधानी में बीते छह वर्षों में मलेरिया का प्रकोप बढ़ा है। आंकड़े बता रहे हैं कि मलेरिया काबू में आने के बजाय बढ़ रहा है। विश्व मलेरिया दिवस पर की गई पड़ताल में सामने आया कि मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, जबकि रोकथाम के इंतजाम नाकाफी है।
मलेरिया विभाग के आंकड़े बताते है कि वर्ष 2020 में जहां केवल 25 मामले थे, वहीं 2025 में यह संख्या छलांग लगाकर पौने सात सौ के करीब पहुंच गई। संक्रमण की यह रफ्तार गंभीर है। राहत की बात यह रही कि समय पर इलाज मिलने से इन पांच वर्षों में कोई जनहानि दर्ज नहीं हुई है। समय पर जांच और इलाज से मौतों को रोका जा सका, लेकिन संक्रमण की रोकथाम में अब भी कई खामियां हैं।
हर साल बरसात के मौसम में हालात और बिगड़ जाते हैं। जलभराव और गंदगी मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करती है। नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग नियमित फॉगिंग और एंटी-लार्वा छिड़काव का दावा करते हैं, लेकिन कई इलाकों में यह कार्य नियमित रूप से नहीं हो पाता। आरोप है कि नालियों की सफाई न होने से मच्छर पनप रहे है। वहीं, जिला मलेरिया अधिकारी ऋतु श्रीवास्तव ने बताया कि फागिंग और एंटीलार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। मलेरिया के लक्षण वाले मरीजों की पहचान कर जांच कराई जा रही है।
प्रमुख लक्षण
तेज बुखार के साथ तेज ठंड और कंपकंपी अत्यधिक पसीना आना और कमजोरी सिरदर्द, जी मिचलाना और मांसपेशियों में दर्द।
बचाव के उपाय
सोते समय हमेशा मच्छरदानी लगाएं। पूरी आस्तीन के कपड़ों से शरीर को ठककर रखेकूलर, पुराने टायर और गड्ढों में पानी जमा न होने दे, रुके हुए पानी में केरोसिन या मोबिल ऑयल डाले।
पिछले पांच साल के आंकड़े
2020 25
2021 34
2022 127
2023 97
2024 492
2025 676