रहमानखेड़ा में मौजूद वन विभाग की टीम।
लखनऊ। रहमानखेड़ा में दो दिन से वन विभाग की टीम बाघ की तलाश में जुटे हैं, लेकिन उसकी लोकेशन नहीं मिली है। बाघ ने एक बार फिर से बंशीगढ़ी का रास्ता अपनाया है। इस पर टीम बंशीगढ़ी जाने वाले रास्ते पर बाघ के पगचिह्न तलाश रही है।
बाघ ने बीती 22 फरवरी को रहमानखेड़ा में पड़वे का शिकार किया था। इसे बाघ ने दो दिन में खाया। पेट भरने के बाद बाघ रहमानखेड़ा में घूमता रहा। वन विभाग की टीम ने बाघ को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन बाघ रहमानखेड़ा से बाहर निकल गया।
यही वजह है कि बाघ की लोकेशन बीते दो दिन से रहमानखेड़ा में नहीं मिली है। टीम थर्मल ड्रोन व हथिनियों के साथ कॉम्बिंग कर बाघ की तलाश कर रही है। शुक्रवार को भी बाघ के पगचिह्न नहीं मिले हैं। वन विभाग के अफसरों ने बताया कि बाघ बंशीगढ़ी की ओर जंगल की तरफ निकल गया है। टीम बंशीगढ़ी जाने वाले सभी रास्तों पर कॉम्बिंग कर रही है।
कनार गांव में हिंसक जानवर के पगचिह्न मिले
शनिवार सुबह कनार गांव में चंदर के आम के बाग में हिंसक जानवर के पगचिह्न मिले हैं। इससे ग्रामीणों में दहशत है। वन विभाग की टीम ने पगचिह्नों का निरीक्षण किया। टीम ने बताया कि पगचिह्न देखने में डॉग फैमली के लग रहे हैं, जो कि लकड़बग्घे या सियार के हो सकते हैं।