लखनऊ। इकाना स्टेडियम से टी-20 मैच देखकर लौट रहे तीन दोस्तों की बाइक शनिवार देर रात गोमतीनगर विस्तार के जी-20 रोड पर अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। हादसे में बाइक चला रहे 16 वर्षीय हर्ष कश्यप की मौत हो गई, जबकि बाइक पर सवार उसके दो साथी आदर्श और शानू उर्फ गोविंद गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के वक्त बाइक पर तीन लोग सवार थे और हर्ष ने हेलमेट नहीं पहना था।
गाजीपुर के मुलायम नगर सरोज विहार निवासी हर्ष निजी स्कूल में हाईस्कूल का छात्र था। पिता जसकरन उर्फ करन कश्यप ने बताया कि हर्ष शनिवार शाम दो दोस्तों के साथ बिना बताए बाइक से मैच देखने गया था। रात करीब 10:30 बजे फोन पर बात हुई तो उसने मैच देखने की जानकारी दी और जल्द घर लौटने की बात कही।
करीब 11 बजे तीनों बाइक से घर के लिए निकले। बाइक हर्ष चला रहा था। जी-20 रोड पर तेज रफ्तार बाइक अचानक अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। टक्कर में हर्ष का सिर डिवाइडर से जा लगा और उसे गंभीर चोट आई। राहगीरों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने तीनों को राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचाया। इलाज के दौरान हर्ष ने दम तोड़ दिया। आदर्श और शानू का इलाज चल रहा है। एडीसीपी पूर्वी अमोल मुर्कुट ने बताया कि मामले में अभी कोई तहरीर नहीं मिली है।
16 वर्ष के बेटे को एक माह पहले ही दिलाई थी स्पोर्ट्स बाइक
जिस स्पोर्ट्स बाइक के लिए 16 वर्षीय हर्ष कश्यप लंबे समय से जिद कर रहा था, वही बाइक शनिवार रात उसकी मौत की वजह बन गई। हादसे से करीब एक महीने पहले ही पिता करन कश्यप ने बेटे की जिद पूरी करते हुए बाइक किस्तों पर खरीदी थी। उन्हें डर रहता था कि कम उम्र में बाइक चलाना खतरनाक हो सकता है, इसलिए वह बेटे को बाइक चलाने से रोकते थे और चाबी भी छिपाकर रखते थे। शनिवार शाम वह बाजार सामान लेने गए थे। इसी दौरान हर्ष बाइक लेकर दोस्तों के साथ निकल गया।
करन आरा मशीन पर काम करते हैं। उन्होंने बताया कि हर्ष लगातार स्पोर्ट्स बाइक दिलाने की मांग करता था। बेटे की जिद के आगे उन्होंने पत्नी आरती के नाम से बाइक खरीदी थी। परिवार को क्या पता था कि कुछ ही समय बाद यही बाइक घर में मातम की वजह बन जाएगी।
एक बेटे को खोने का गम अभी कम नहीं हुआ था
करन ने बताया कि उनके बड़े बेटे अविनाश की भी सड़क हादसे में मौत हुई थी। बीते वर्ष 16 फरवरी को चिनहट के कमता इलाके में बाइक हादसे में अविनाश ने दम तोड़ दिया था। बड़े बेटे की मौत के बाद परिवार अभी उस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि छोटे बेटे हर्ष की भी सड़क हादसे में जान चली गई। पोस्टमार्टम हाउस पर बेटे का शव देखकर करन बेसुध हो गए। एक साल के भीतर दो बेटों को सड़क हादसों में खोने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।