कागजों पर 450 बसों को पचास लाख किमी दौड़ाने वाले तीन अफसरों पर चार्जशीट जारी होगी।
उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम में बस के फर्जी किमी अर्जित करने के मामले में मेरठ परिक्षेत्र के तीन बड़े अफसर फंस गये हैं।
यानी कम डीजल में बस के अधिक किमी चलने के फर्जी आंकड़े पेश करके वाहवाही लूटी गई। इनमें दो क्षेत्रीय प्रबंधक और एक सेवा प्रबंधक हैं।
ऐसे अफसरों के आरोप की चार्जशीट तैयार हो चुकी है। यह चार्जशीट सौंपने के लिये सोमवार को तीनों अफसरों को मुख्यालय तलब किया गया है।
मेरठ परिक्षेत्र में यह फर्जीवाड़ा कब से चल रहा था की उच्च स्तरीय जांच होगी।
गौरतलब है, कि मेरठ परिक्षेत्र में निगम की कुल 450 बसें मेरठ के तीन डिपो सोहराब गेट, मेरठ, भैनाली और दो अन्य बड़ौत एवं गढ़ डिपो से संचालित होती हैं।
इन बसों का अप्रैल 2013 से फरवरी 2014 तक डीजल का फर्जी औसत किमी 50 लाख किमी दर्शाया गया है।
इस खुलासे के बाद प्रबंध निदेशक मुकेश कुमार मेश्राम ने तत्कालीन क्षेत्रीय प्रबंधक संदीप लाहा (जो मेरठ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज के प्रबंध निदेशक), क्षेत्रीय प्रबंधक डीबी सिंह (वर्तमान में चित्रकूटधाम क्षेत्रीय प्रबंधक) एवं वर्तमान में सेवा प्रबंधक पद पर तैनात मृदाल अग्रवाल को इस फर्जीवाड़े का सूत्रधार मानते हुए चार्जशीट तैयार कराई है।
इस चार्जशीट में तीनों अफसरों को 450 बसों के द्वारा वास्तविक डीजल खपत करने एवं उसके द्वारा तय की गई दूरी के किमी के आंकड़े देकर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
कार्यकारी अपर प्रबंध निदेशक एवं मुख्य प्रधान प्रबंधक (कार्मिक) राजेंद्र कुमार सिंह ने तीनों अफसरों को सोमवार तलब किया है।
आंखें मूंदे रहे मुख्यालय के सीजीएम
मेरठ परिक्षेत्र के तीनों अफसरों के फर्जीवाड़े पर मुख्यालय की संचालन एवं तकनीकी इकाई के सीजीएम के द्वारा आंखें मूंदे रखने पर भी तमाम सवाल उठने लगे हैं।
सवाल यह भी संदीप लाहा जिस-जिस परिक्षेत्र में तैनात रह चुके उस परिक्षेत्र की संचालन के सीजीएम ने अब तक जांच की शुरुआत क्यों नहीं कराई।
क्षेत्रीय प्रबंधकों पर जांच बैठी
प्रबंध निदेशक ने खुलासे के बाद निगम के कुल 18 परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधकों पर जांच बैठा दी है।
पहले चरण में सभी नोडल अफसरों से एक साल में क्षेत्रीय प्रबंधकों एवं सेवा प्रबंधकों के द्वारा पेश किये गये लोड फैक्टर एवं डीजल औसत के आंकड़ों की जांच रिपोर्ट मांगी है।
इसमें गड़बड़ी मिलने पर उच्च स्तरीय समिति बनाकर जांच कराने का फैसला लिया जाएगा।