जैश-ए-मोहम्मद के तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों को भारत में आतंकी साजिश रचने, युद्ध छेड़ने समेत कई मामलों में बृहस्पतिवार को दोषी करार दिया गया। तीनों आतंकियों सैफुर्रहमान, मोहम्मद जावेद और मिर्जा राशिद बेग को एसटीएफ ने 2007 में लखनऊ में गिरफ्तार किया था।
विशेष न्यायाधीश ओम प्रकाश मिश्रा ने इन दहशतगर्दों को दोषी करार देते हुए सजा पर बहस के लिए 14 जुलाई की तारीख मुकर्रर की है। इसके बाद तीनों को सजा सुनाई जाएगी। फिलहाल तीनो आतंकियों को हाईसिक्यूरिटी बंदीगृह में रखा गया है।
इस मामले में अभियोजन की ओर से सरकारी वकील एमके सिंह ने बताया कि पाक में ट्रेनिंग पाए जैश के इन आतंकियों को नौ साल पहले मेरठ और गाजियाबाद की एसटीएफ ने दबोचा था। इनके पास से भारी मात्रा में हथियार व आरडीएक्स बरामद किया गया था। तीनों आतंकियों को पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद, बहावलपुर और बालाकोट के आतंकी कैंपों में ट्रेनिंग दी गई थी।
42 आतंकियों को छुड़ाने के लिए नेताओं के अपहरण की थी साजिश
यूपी एसटीएफ को 2007 में खुफिया जानकारी मिली कि कुछ आतंकी भारत में घुस आए हैं। वे यूपी में देश के प्रभावशाली राजनेताओं का अपहरण कर भारतीय जेलों में बंद संसद पर हमला करने वाले अफजल गुरु समेत अपने 42 आतंकी साथियों को छुड़ाना चाहते हैं।
इस खुफिया इनपुट के आधार पर मेरठ और गाजियाबाद एसटीएफ की टीम ने 15-16 नवंबर, 2007 की रात में लखनऊ के गुडंबा थाना क्षेत्र में टेढ़ी पुलिया के पास मौरंग मंडी पर सेंट्रो कार में सवार आतंकियों को रोकने का प्रयास किया।
तब आतंकियों ने पुलिस पर ही हमला कर दिया और फायरिंग करने लगे। मुठभेड़ के बाद आखिरकार एसटीएफ ने आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आतंकियों ने साजिश का खुलासा किया था।
तत्कालीन डीजी ने कहा था- राहुल थे निशाने पर
आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद यूपी पुलिस के तत्कालीन डीजी विक्रम सिंह ने बताया था कि आतंकियों के टारगेट पर प्रमुख रूप से कांग्रेस नेता राहुल गांधी थे। वे गांधी परिवार केकिसी भी सदस्य को अपहरण करना चाहते थे।
आतंकियों की गिरफ्तारी के समय राहुल लखनऊ में ही थे। डीजी ने कहा था कि वे दूसरे और राजनीतिक दल के प्रमुख नेता को भी वे अपहरण करने की योजना के साथ आए थे।
ये प्रमुख आरोप साबित हुए
भारत सरकार के खिलाफ युद्घ छेड़ने का षडयंत्र, इसके लिए अस्त्र व शस्त्र जुटाना, पुलिस पर हमला समेत कई आरोप साबित हुए।
कितनी हो सकती है सजा
आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक।
कांधार विमान अपहरण जैसी रची थी साजिश
सभी आतंकियों को पाकिस्तान में ट्रेनिंग दी गई थी। इनका एकमात्र लक्ष्य अपहरण के बाद अपने आतंकी साथियों की रिहाई थी। वे अपहरण किए नेता को दो से तीन महीने तक अपने कब्जे में रखने की तैयारी के साथ आए थे।
इस दौरान कैसे बीबीसी के दो पत्रकारों से संपर्क करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कांड को ले जाना है, यह भी उन्हें सिखाया गया था। अगर वे सफल हो जाते तो यह सब बहुत कुछ एअर इंडिया के विमान को हाईजैक करके कांधार ले जाने वाली आतंकी घटना जैसा होता।
कांग्रेस के बड़े नेता के अपहरण की तैयारी थी
विवेचना अधिकारी राहुल श्रीवास्तव मुठभेड़ के समय महानगर में सीओ पद पर तैनात थे।
उन्होंने अदालत में अपने बयान में कहा कि आतंकियों ने बताया कि कांग्रेस के बड़े नेता जो उस समय लखनऊ में मौजूद थे, उनका अपरहण करके कश्मीर के मुद्दे पर बातचीत और भारत की गिरफ्त में आए आतंकियों को छुड़ाने की उनकी योजना थी। उस नेता का वीडियो और तस्वीरें पाकिस्तान में प्रशिक्षण के दौरान उन्हें दिखाई गई थी।
पाकिस्तान में कहां के हैं दहशतगर्द
- फोटो : amar ujala
1. सैफुर्रहमान उर्फ यूसुफ उर्फ फैसल, उम्र 30 साल
पिता - खलील अहमद उर्फ खलीलउर्रहमान
पता : कासिमपुर कॉलोनी, गली नंबर 3, तहसील व जिला मुल्तान, पंजाब-पाकिस्तान।
वर्तमान पता : महमूदाबाद, गली नंबर 3, नज्द मवकी, जामा मस्जिद, पुलिस स्टेशन कासिमपुर कॉलोनी, मुल्तान, पंजाब-पाकिस्तान।
2. आबिद उर्फ फत्ते उर्फ सफदर उर्फ अयूब, उम्र 35 साल
पिता - मोहम्मद रफीक
पता : मकान नंबर 23, गली नंबर 06, मजंग रोड, लाहौर, पाकिस्तान।
3. मिर्जा राशिद बेग उर्फ राजा काजमी, उम्र 35 साल
पिता - मिर्जा आरिफ बेग
पता - मकान नंबर 8, गली नंबर 10, चक जगना, नई आबादी, सियालकोट रोड, गुजरावाला, पाकिस्तान।
(तीनों आतंकियों को 27 फरवरी 2011 को लखनऊ जेल लाया गया था। सभी पर गुडंबा थाने में केर्स दर्ज किया गया।)