प्रदेश में 16.56 करोड़ रुपये के अनुदानित बीज घपले में बीज विकास निगम के तीन कर्मचारी दोषी पाए गए हैं। इनमें कानपुर स्टोर के विपणन अधिकारी आलोक कुमार व अवधेश कुमार सिंह और शैक्षिक सहायक उमेश राय शामिल हैं।
कृषि विभाग उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम से बीज खरीदकर किसानों को अनुदान पर उपलब्ध कराता है। वर्ष 2018 में ‘अमर उजाला’ ने बीज खरीदने में बड़े घोटाले का खुलासा किया था। जांच में पाया गया कि वर्ष 2011-12 से 2018-19 के बीच 53 हजार क्विंटल बीज कानपुर के निगम गोदाम से उठाना दिखाया गया, लेकिन किसानों को इसका वितरण नहीं किया गया। 50 हजार क्विंटल बीज गेहूं का था, जबकि तीन हजार क्विंटल सरसों और चना का बीज था। कृषि विभाग ने निगम को इस बीज की कीमत 16.56 करोड़ रुपये का भुगतान किया था।
बीज विकास
TV निगम ने मामले की जांच संयुक्त मुख्य बीज उत्पादक अधिकारी योगेश यादव को सौंपी थी। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट में बीज विकास निगम के तीन कर्मचारियों को दोषी ठहराने के साथ ही कहा है कि घपले की अवधि में इटावा में तैनात रहे जिला कृषि अधिकारियों, बफर गोदाम निरीक्षकों और ठेकेदारों को भी उत्तरदायी ठहराया है। उन्होंने इन सभी की भूमिका की गहन जांच की संस्तुति की है। कानपुर स्टोर से बीज की आपूर्ति इटावा को दिखाई गई थी।
इनका कहना
जांच रिपोर्ट मिल चुकी है। इसका विधिक परीक्षण कराया जा रहा है। रिपोर्ट में कृषि विभाग के जो अधिकारी जिम्मेदार ठहराए गए हैं, उन पर कार्रवाई के लिए कृषि विभाग को पत्र भेजा जा रहा है।
- रामशब्द जैसवारा, प्रबंध निदेशक, उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम।