सूचना पाकर पुलिस अधीक्षक जुगुल किशोर, एएसपी सिटी अजय प्रताप सिंह, सीओ महसी केके सिंह चौहान, थानाध्यक्ष ब्रह्मानंद सिंह मौके पर पहुंचे हैं। डॉग स्क्वॉयड दस्ते को भी बुलाया गया है।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि प्रथम दृष्टया कमरे में जल रही आग से उत्पन्न जहरीली गैस से दम घुटने से मौत की आशंका है। एक महिला बेहोशी की हालत में जिला अस्पताल में भर्ती है। उसके होश में आने के बाद मौत के कारणों का सही पता चल सकेगा।
कोयले से निकली गैस कमरे में खत्म कर देती ऑक्सीजन
जिले के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आरबी सिंह ने बताया कि कोयला जलने पर इससे जहरीली कार्बन मोनो ऑक्साइड निकलती है। अगर कमरा एयर टाइट है तो कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस कमरे में मौजूद ऑक्सीजन को खत्म कर देती है।
सांस लेने के साथ ही मोनो ऑक्साइड शरीर में पहुंचकर खून में मिल जाती है, जिससे व्यक्ति बेहोश हो जाता है। यह एक्सटीसिया की स्थिति होती है। गैस के कारण दम घुटने से मरीज की मौत हो जाती है।
दम घुटने से दो बच्चियों व नानी की मौत के बाद गांव में मातम पसरा है। एक ही परिवार से तीन अर्थियां उठने के कारण रामसरीक के परिवार वालों की हालत अर्द्ध विक्षिप्तों जैसी हो गई है। पोस्टमार्टम के बाद रविवार देर शाम जब तीनों शव घर पहुंचे तो परिवारीजनों के साथ ही गांव के लोग भी बिलख उठे।
रामगांव थाना के बेगमपुर गांव में रामसरीक राजगीर है। रामसरीक के तीन बेटे हैं। तीनों ने घर बनाया था। परिवार के साथ सुख के क्षण बिताने की कल्पना की थी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
दोपहर में घटना की सूचना मिलने के बाद जब पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे तो गांव छावनी में तब्दील हो गया। देर शाम को जिला मुख्यालय से पोस्टमार्टम के बाद मासूम दिव्या, काजल और उसकी नानी कुंवारी देवी के शव घर पहुंचे तो परिवारीजन बेहाल हो गए। एकत्रित गांव के लोगों की आंखों से भी आंसू रुक नहीं रहे थे।