लखनऊ। ट्रांसपोर्टर राकेश बाजपेयी की पत्नी वीना बाजपेयी को 12 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखने वाले गैंग का पर्दाफाश करते हुए साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने तीन जालसाजों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने खुद को एटीएस इंस्पेक्टर बताकर मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने का डर दिखाते हुए वीना से 90 लाख रुपये ठगे थे। इस गैंग के तार दिल्ली व मुंबई में बैठे साइबर जालसाजों से जुड़े हैं।
डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया कि आलमबाग निवासी वीना बाजपेयी के पास 26 जनवरी को अनजान नंबर से कॉल आई। फोनकर्ता ने खुद को एटीएस मुख्यालय में तैनात इंस्पेक्टर रंजीत कुमार बताया। उसने आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर अपराधों में संलिप्तता का आरोप लगाया और सुप्रीम कोर्ट के नाम से जारी फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाया। इसके बाद आरोपी ने उन्हें 12 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखकर उनके खाते से 90 लाख रुपये दो अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए। जालसाजों ने वीना से 11 लाख रुपये और मांगे तो उन्हें शक हुआ। इस बारे में उन्होंने घरवालों को बताया। इसके बाद उनके पति ने साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज कराई।
साइबर क्राइम थाने के इंस्पेक्टर बृजेश यादव ने बताया कि सर्विलांस की मदद से मंगलवार को पुलिस ने गोरखपुर के पिपराइच जंगल धुसड़ निषाद चौराहा निवासी मयंक, गाजियाबाद निवाड़ी खिंदोेड़ा निवासी इरशाद और दिल्ली प्रेमनगर निवासी मनीष कुमार उर्फ आकाश को गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए आरोपियों के पास से तीन मोबाइल, आईसीआईसीआई और एचडीएफसी बैंक की दो चेक और एक डेबिट कार्ड बरामद किया गया।
गैंग के सरगना दिल्ली व मुंबई में मौजूद
इंस्पेक्टर बृजेश यादव ने बताया कि आरोपियों ने बताया है कि उनके गैंग में कई सदस्य हैं। सभी के काम बंटे हुए हैं। गैंग के सरगना दिल्ली व मुंबई में मौजूद हैं। आरोपियों के पास से बरामद मोबाइल फोन से भी पुलिस को काफी अहम जानकारियां मिली हैं। साइबर क्राइम थाने की पुलिस मोबाइल फोन से मिले डाटा पर काम कर रही है। इसके अलावा गैंग के सरगना और अन्य जालसाजों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
लोगों के खाते में मंगवाते थे ठगी की रकम, तीन प्रतिशत मिलता था कमीशन
ट्रांसपोर्ट कारोबारी की पत्नी को 12 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रख 90 लाख रुपये ठगने वाला गिरोह कई राज्यों में सक्रिय था। इसने अलग-अलग लोगों को अपना निशाना बनाया था। तमिलनाडु सहित कई राज्यों में इस गिरोह के खिलाफ शिकायतें दर्ज हैं। इसकी जानकारी राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल से लखनऊ पुलिस को मिली है।
डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित के अनुसार, आरोपी मयंक श्रीवास्तव ने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण उसने इरशाद से संपर्क किया था। इरशाद ने उसे चालू बैंक खाता उपलब्ध कराने पर कमीशन का लालच दिया। इसके बाद 7 फरवरी को उसे दिल्ली बुलाकर होटलों में ठहराया गया। वहां उसकी मुलाकात इरशाद, आकाश उर्फ मनीष और जीतू उर्फ जीतेंद्र से हुई। आरोपियों ने उसके मोबाइल का पासवर्ड लेकर करोड़ों का साइबर फ्रॉड किया। इसके बदले उसे 10 हजार रुपये दिए और दो लाख रुपये देने का वादा किया। आरोपियों ने मयंक के नाम से आईसीआईसीआई और एचडीएफसी बैंक में खाता खुलवाया था। बैंक की चेकबुक और डेबिट कार्ड अपने कब्जे में ले लिए।
आरोपी इरशाद ने बताया कि वह तीन प्रतिशत कमीशन पर आकाश उर्फ मनीष और जीतू उर्फ जीतेंद्र के लिए काम करता है। वह खाताधारकों को धन का लालच देकर उनके बैंक खाते, चेकबुक और डेबिट कार्ड ले लेता था। वह व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से गिरोह के अन्य जालसाजों से जुड़ा रहता था। आकाश उर्फ मनीष भी जीतू उर्फ जीतेंद्र के लिए काम करता था और उसे भी साइबर फ्रॉड से मिली रकम का तीन फीसदी कमीशन मिलता था।