अनुपूरक बजट में अयोध्या में भगवान राम की दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थापित करने के लिए धन का उल्लेख तो नहीं किया गया है। लेकिन पयर्टन की मद में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान होने से इसकी ध्वनि निकल रही है। माना जा रहा है कि इस मद का ज्यादातर हिस्सा अयोध्या में मूर्ति स्थल के विकास और अन्य कामों में खर्च होगा।
बजट में अयोध्या में होने वाले दीपोत्सव के लिए 6 करोड़, भजन संध्या स्थल के निर्माण को 4.85, संस्कृति विभाग की तरफ से विभिन्न कार्यों के लिए 4.80 करोड़ और राम की पैड़ी की रिमॉडलिंग के दूसरे चरण के कामों के लिए 10 करोड़ रुपये देकर भी सरकार के लिए राम की नगरी के महत्व को साबित किया गया है।
गाजियाबाद में बने कैलाश मानसरोवर भवन के लिए धन देकर और नैमिषारण्य व विंध्याचल के लिए 10-10 करोड़ देकर भी एजेंडे पर आगे बढ़ने का इरादा दिखाया गया है।
नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना व सीएम योगी
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मुख्यमंत्री ने प्रयागराज कुंभ में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से प्रयागराज को जोड़ने के लिए ‘गंगा एक्सप्रेस-वे’ की घोषणा की थी। अनुपूरक अनुदान में इसे शामिल करके भी सांस्कृतिक एजेंडे को परवान चढ़ाया है और वादों पर अमल का इरादा भी दिखाया है।
सरकार ने बजट में राज्य सरकार के संसाधनों से प्रदेश में जिन सात नगरों को स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा की है उसमें भी अयोध्या और मथुरा को शामिल करके एजेंडे को जमीन पर उतारने का संदेश साफ किया है। वाराणसी पहले से ही केंद्र सरकार के स्मार्ट सिटी योजना का हिस्सा है।
वैचारिक संदेश: सदन में अनुपूरक बजट पेश करने का दिन जैसे सरकार के सरोकारों का संदेश देने का ही दिन था। तभी तो बजट के अलावा दूसरे कामों से भी सरकार इसी दिशा में आगे बढ़ती दिखी।
सदन में इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय का नाम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व संघचालक स्व. प्रो. राजेन्द्र सिंह ‘रज्जू भैया’ के नाम पर ‘प्रो. राजेन्द्र सिंह रज्जू भैया विश्वविद्यालय प्रयागराज’ और डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद का नामकरण डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अयोध्या करने के विधेयकों के जरिये भी सरकार ने वैचारिक संदेश देने की कोशिश की है।