- वर्ष 2016-17 में बैंकों ने प्रदेश में कुल 1.37 लाख करोड़ का ऋण दिया था।
- वर्ष 2022-23 में कुल तीन लाख करोड़ का ऋण दिया गया, दिसंबर-2023 तक 2.98 लाख करोड़ का ऋण दिया जा चुका है।
डिजिटल लेनदेन भी सात गुना तक पहुंचा
यूपी ने डिजिटल लेनदेन में सबसे तेज तरक्की की है। वर्ष 2018 में जहां 161 करोड़ डिजिटल लेनदेन किए गए थे। वर्ष 22.23 में ये संख्या 1174 करोड़ से अधिक हो गई।
वर्ष डिजिटल लेनदेन की संख्या -- वृद्धि दर
18-19 161.69 करोड़-- 31.63 फीसदी
19-20 189.07 करोड़-- 16.93 फीसदी
20-21 391.02 करोड़-- 106.81 फीसदी
21-22 426.68 करोड़-- 09.11 फीसदी
22-23 1174.32 करोड़-- 175 फीसदी
23-24 640.57 करोड़
(23-24 के आंकड़े दिसंबर तक)
केश्री वेल्थ क्यूरेटर के को फाउंडर राजीव सिंह का कहना है, ‘निवेशकों के साथ-साथ लोगों का यूपी में भरोसा बढ़ा है। तभी फाइनेंस को लेकर जागरुकता भी तेजी से बढ़ी है। प्रदेश के एक-एक जिले में डीमैट सेंटरों और म्यूचुअल फंड कंपनियों की पहुंच हो गई है। लोगों की आय के स्रोत बढ़े हैं। अनुमान है कि इस वर्ष के अंत तक म्यूचुअल फंड में यूपी का निवेश 2.84 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा। वर्ष 2027 तक ये पांच लाख करोड़ और 2031 तक 11 लाख करोड़ पार कर जाएगा। साफ है कि दस खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था की दिशा में यूपी की रफ्तार बरकरार है।
लेकिन ये चुनौतियां भी
- पिछले सात साल में बैंकिंग कारोबार 12.80 लाख करोड़ से 26.66 लाख करोड़ पहुंच गया है, लेकिन एजुकेशन लोन देने में बैंक कंजूसी बरत रहे हैं।
- शिक्षा लोन में बैंकों की कंजूसी। शिक्षा-गृह व अन्य लोन का लक्ष्य 35 हजार करोड़ है, लेकिन दिसंबर तक दिए गए 11 हजार करोड़।
- कुल लोन में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी 22.48 फीसदी, इसे ज्यादा करने की जरूरत है।
- जिन जिलों में ऋण-जमा अनुपात 40 फीसदी से कम है, उनके लिए अलग से कार्ययोजना बनाए जाने की जरूरत।
- प्रदेश के बैंकों में 11.98 लाख के रिकवरी सर्टिफिकेट फंसे हैं।
- सरफेसी एक्ट के तहत 6700 से ज्यादा मामले सालों से फंसे हैं।