17वीं लोकसभा के चुनाव कई बातों व प्रयोगों के लिए जाना जाएगा। मुख्यता यह भाजपा को हराने और मोदी को जिताने पर केंद्रित दिखा। साथ ही जिंदा तो क्या मरे हुए लोगों पर लगाए गए आरोपों के लिए 2019 का चुनाव जाना जाएगा।
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कुछ दुश्मन इस चुनाव में एक साथ आए गए और एक दूसरे के पक्ष में नारे लगाए। मुलायम सिंह यादव और मायावती 25 वर्ष बाद एक साथ मंच पर दिखे।
एक खास बात यह भी रही कि अबकी बार असर और जमीनी मुद्दे गायब रहे। उसकी जगह पीएम मोदी ही मुद्दा बने रहे। गठबंधन अपने प्रत्याशी को जिताने के जगह विपक्षी को हराने पर माथापच्ची करता रहा। वही भाजपा मोदी के नाम पर वोट मांगते रहे।
मोदी के मुद्दा बनने का प्रमाण प्रियंका गांधी वाड्रा का यह बयान बना, जिसमें उन्होंने कहा कि कांग्रेस के प्रत्याशी जहां कमजोर हैं, वहां वह गठबंधन का नहीं बल्कि भाजपा का नुकसान कर रहे हैं। मायावती ने रायबरेली और अमेठी में अपने मतदाताओं से कांग्रेस को वोट करने की अपील की।
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पुरानी कहावत बना फार्मूला
‘सियासत में सब कुछ संभव’ कहावत पुरानी है, पर उत्तर प्रदेश में बड़े-बड़े राजनीतिक पंडित भी मानते थे कि सपा और बसपा की दोस्ती संभव नहीं। पर, 2019 के चुनाव ने इस कहावत को फार्मूला बनते देखा। अखिलेश व मायावती ने मंच साझा कर भाषण ही नहीं दिए, बल्कि मायावती और मुलायम जैसे सियासी दुश्मनों को भी इस चुनाव ने एक मंच पर लाकर दिखा दिया।
बुआ और बबुआ जैसे शब्दों का प्रयोग भले ही पहले तंज के रूप इस्तेमाल हो रहा था, लेकिन डिम्पल यादव ने मंच पर मायावती के पैर छूकर और आशीर्वाद लेकर यह साफ कर दिया की उनके लिए मुलायम का परिवार अब गैर नहीं।
नए चेहरों की एंट्री और सोशल मीडिया
चुनाव से ठीक पहले मायावती ने अपने 25 साल के भतीजे आकाश की राजनीति में एंट्री कराई। वहीं मीडिया से उचित दूरी बनाए रखने वाली मायावती ने ट्विटर अकाउंट खोला। चुनाव के दौरान उन्होंने अपने इस नए प्लेटफॉम से कई हमले किए।
प्रियंका गांधी वाड्रा की कांग्रेस की सियासत में नेता और पदाधिकारी के रूप में सक्रियता भी चुनाव का यादगार हिस्सा बना। वह पहले भी चुनाव प्रचार के लिए यूपी आती थीं, पर इस बार नेता के तौर पर प्रचार किया।
राजनीतिक दलों के नेताओं का एक-दूसरे पर आरोप लगाना कोई नई बात नहीं है। इसलिए चुनाव प्रचार के दौरान बेतुके बोल जब नई ऊंचाई पर पहुंचे तो उन्होंने रिकॉर्ड बना डाला। एक-दूसरे पर निशाना साधने में शब्दों की मर्यादा बहुत पीछे छूट गई। आजम खां की जयाप्रदा को लेकर कही गई बाते हो या फिर उनके पुत्र का बयान। चुनाव खत्म होते आजम की बीवी ने भी टिप्पणी दे डाली।
इस क्रम में चौकीदार, अली बजरंग बली, नीच जैसे शब्दों को बोलबाला रहा। साथ ही प्रियंका ने मोदी की तुलना दुर्योधन से की तो कांग्रेस के दूसरे नेता संजय निरूपम ने औरंगजेब से। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास से ‘चिलम’ ढुंढ़वाने की बात कही।
नरेंद्र मोदी ने राजीव गांधी का नाम लिए बिना कहा, ‘मिस्टर क्लीन भ्रष्टाचारी नंबर वन बन गए।’ मायावती ने कहा,‘मोदी के पास जाने वाले भाजपा नेताओं की पत्नियां डर रही हैं? सोचती हैं कि कहीं मोदी उनके पतियों को भी अलग न कर दें।’