बृज और मध्य यूपी की 12 सीटों पर मंगलवार को चुनाव प्रचार थम गया। इन सीटों पर पॉवर और ग्लैमर कसौटी पर है।
सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह, डिंपल यादव और अक्षय यादव के साथ ही विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद, ड्रीम गर्ल हेमामालिनी और अमर सिंह का इसी चरण में इम्तिहान होना है।
सपा के मजबूत आधार वाले क्षेत्र की इन सीटों पर कहीं जाति-धर्म का फैक्टर असर दिखा रहा है तो कहीं विकास प्रभावी मुद्दा बनता दिख रहा है।
12 में से चार पर सपा का कब्जा
प्रदेश में तीसरे चरण की 12 सीटों पर 24 अप्रैल को मतदाता जिन प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में लॉक करेंगे, उनमें वर्ष 2009 के चुनाव में सपा ने सर्वाधिक पांच सीटें जीती थीं।
बाद में एक सीट पर उपचुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा और उसकी सीटें घटकर चार रह गई थीं। कांग्रेस को तीन, रालोद को दो और भाजपा व बसपा को एक-एक सीट मिली थी।
एक सीट पर कल्याण सिंह विजयी रहे थे। पिछले विधानसभा चुनाव में भी सपा ने यहां कामयाबी का झंडा गाड़ा।
60 सीटों में सपा को 37, बसपा को 12, भाजपा को पांच, रालोद को चार, कांग्रेस और निर्दलीय को एक-एक सीट मिली थी। तीसरे चरण की प्राय: सभी सीटों पर समीकरण अलग-अलग नजर आ रहे हैं।
मैनपुरी: पलड़ा मुलायम का भारी
सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से हैट्रिक बनाने के लिए चुनाव मैदान में हैं। उनका मुकाबला बसपा की संघमित्रा मौर्य और भाजपा के शत्रुघ्न सिंह से है।
यूं तो मुलायम से सीधे मुकाबले का दावा बसपा और भाजपा दोनों के ही प्रत्याशी कर रहे हैं लेकिन वे बहुत गंभीर चुनौती देते नजर नहीं आ रहे।
बहरहाल यहां पलड़ा ‘नेताजी’ का भारी नजर आ रहा है। चुनाव यह भी तय करेंगे कि आम आदमी पार्टी से चुनावी जंग में उतरे पीसीएस एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष बाबा हरदेव सिंह कहां टिकते हैं?
कन्नौज: पत्नी संग अखिलेश का इम्तिहान
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव कन्नौज लोकसभा सीट से सपा की प्रत्याशी हैं। वर्ष 2012 में उन्होंने यहां से निर्विरोध निर्वाचित होकर रिकॉर्ड बनाया था।
चुनाव प्रचार में डिम्पल ने जरूर खूब मेहनत की, लेकिन असली इम्तिहान तो अखिलेश का ही है।
डिम्पल को भाजपा के सुब्रत पाठक और बसपा के निर्मल तिवारी से चुनौती मिल रही है। यहां कांग्रेस ने प्रत्याशी नहीं उतारा है।
फीरोजाबाद: रामगोपाल का कौशल कसौटी पर
फीरोजाबाद सीट पर सपा महासचिव रामगोपाल यादव कड़ी परीक्षा में फंसे हैं। यहां उन्होंने अपने बेटे अक्षय यादव को पहली बार चुनावी जंग में उतारा है।
चुनाव की कमान खुद रामगोपाल के हाथों में है। वर्ष 2009 में यहां से अखिलेश यादव जीते थे। उनके इस्तीफा देने के बाद हुए उपचुनाव में डिम्पल यादव को कांग्रेस के राज बब्बर के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा था।
इस बार अक्षय के सामने भाजपा के प्रो. एसपी सिंह बघेल चुनौती पेश कर रहे हैं। बसपा के विश्वदीप सिंह और कांग्रेस के अनिल चतुर्वेदी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने के लिए जुटे हुए हैं।
खुर्शीद, हेमा और जयंत की किस्मत दांव पर
फर्रूखाबाद: विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद को सपा केरामेश्वर यादव, भाजपा के मुकेश राजपूत और बसपा के जयवीर सिंह चुनौती दे रहे हैं। सपा से बगावत करके चुनाव लड़ रहे सचिन सिंह यादव पर भी सभी की नजरें हैं। सीधे मुकाबले की तस्वीर उभरती नहीं दिख रही। फिलहाल लड़ाई त्रिकोणात्मक मानी जा रही है।
मथुरा: बृज की भूमि पर भाजपा से हेमामालिनी के उतरने के कारण सभी की नजरें इस पर टिकी हैं। यहां रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह की प्रतिष्ठा दांव पर है।
रालोद से उनके बेटे और मौजूदा सांसद जयंत चौधरी उम्मीदवार हैं। सपा से चंदन सिंह और बसपा से योगेश कुमार द्विवेदी मैदान में हैं।
मुख्य मुकाबले में आने के लिए सभी दल पूरी ताकत झोंक रहे हैं लेकिन असली टक्कर जयंत और हेमामालिनी के बीच आंकी जा रही है।
हाथरस और फतेहपुर सीकरी का हाल
हाथरस: इस सीट से पिछली बार रालोद की सारिका सिंह बघेल सांसद चुनी गईं थी। बाद में वह सपा में चली गईं। सपा ने उन्हें आगरा से प्रत्याशी बनाया लेकिन फिर पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
सपा ने यहां पार्टी महासचिव रामजी लाल सुमन को मैदान में उतारा है। रालोद से निरंजन सिंह धनगर, भाजपा से राजेश कुमार दिवाकर और बसपा से मनोज कुमार सोनी चुनावी जंग लड़ रहे हैं। यहां रालोद, सपा और बसपा की नजरें मुस्लिम वोटों पर टिकी है।
फतेहपुर सीकरी: अमर सिंह के चुनावी जंग में कूदने से ज्यादा चर्चा में आई फतेहपुर सीकरी सीट पर प्रत्याशियों में जातियों पर वर्चस्व की जंग चल रही है।
यहां सपा से कैबिनेट मंत्री महेंद्र अरिदमन सिंह की पत्नी पक्षालिका सिंह, बसपा से मौजूदा सांसद सीमा उपाध्याय और भाजपा से पूर्व मंत्री चौधरी बाबूलाल मैदान में हैं।
एटा और आगरा का जमीनी सच
एटा: इस सीट के नतीजे से तय होगा कि एटा के लोगों ने कल्याण सिंह की सियासी विरासत उनके बेटे राजबीर सिंह उर्फ राजा भैयाको सौंपी या नहीं। राजबीर भाजपा से प्रत्याशी हैं।
सपा ने देवेंद्र सिंह यादव और बसपा ने नूर मोहम्मद खान को टिकट दिया है। कांग्रेस ने यह सीट समझौते में महान दल को दी है, जिसने ठाकुर जोगिंदर सिंह भदौरिया को चुनाव मैदान में उतारा है। इस सीट पर दिलचस्प लड़ाई मानी जा रही है।
आगरा: ताजनगरी की सुरक्षित संसदीय सीट पर भाजपा ने मौजूदा सांसद रमाशंकर कठेरिया को फिर से मैदान में उतारा है। बसपा से नारायण सिंह सुमन, सपा से महाराज सिंह धनगर और कांग्रेस से उपेंद्र सिंह चुनाव लड़ रहे हैं।
चुनाव के दौरान भाजपा के कई नेताओं को पार्टी में शामिल कर सपा ने उसे झटका देने की कोशिश की है। इस सीट पर फिलहाल त्रिकोणात्मक लड़ाई के आसार बनते दिख रहे हैं।
क्या हो रहा इटावा और हरदोई में?
इटावा: यह सीट सपा का गढ़ कही जाती है। सपा ने यहां मौजूदा सांसद प्रेमदास कठेरिया पर फिर भरोसा जताया है। उनके सामने भाजपा ने अशोक कुमार दोहरे, बसपा ने अजयपाल सिंह यादव और कांग्रेस के हंसमुखी कोरी को मैदान में उतारा है।
हरदोई: इस सुरक्षित सीट पर सपा की हार-जीत को सपा महासचिव नरेश अग्रवाल से जोड़कर देखा जाएगा। सपा ने मौजूदा सांसद उषा वर्मा को फिर से मैदान में उतारा है।
भाजपा ने अंशुल वर्मा, बसपा ने शिव प्रसाद वर्मा और कांग्रेस ने सर्वेश कुमार को उम्मीदवार बनाया है। परिणाम जो भी हो, फिलहाल मुकाबला त्रिकोणात्मक आंका जा रहा है।
अकबरपुर: यहां 2009 में विजयी रहे कांग्रेस के राजाराम पाल फिर मैदान में हैं। उन्हें भाजपा के देवेंद्र सिंह उर्फ भोले सिंह, सपा के लाल सिंह तोमर और बसपा के अनिल शुक्ला वारसी से चुनौती मिल रही है।