लखनऊ। समिट बिल्डिंग में फर्जी कॉल सेंटर खोलकर अमेरिकी नागरिकों से 250 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी के मामले में पुलिस को अहम जानकारी मिली है। जांच में पता चला कि अमेरिकी स्कैमर्स टोल-फ्री नंबर खरीदते थे। इन्हें व्हाट्सएप ग्रुप के जरिये भारत के स्कैमर्स को भेजा जाता था। चूंकि इन पर कॉल मुफ्त होती थी। इसलिए अमेरिकी नागरिकों को शिकायत दर्ज करने के लिए मेसेज भेजे जाते थे।
एडीसीपी क्राइम किरन यादव के अनुसार, क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने दो फर्जी टोल-फ्री नंबर चिह्नित किए हैं। इन नंबरों पर फोन करने के लिए विदेशी नागरिकों को उकसाया जाता था। ये नंबर उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय के माध्यम से अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों से साझा किए जाएंगे। इससे अमेरिका में बैठे स्कैमर्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकेगी।
अमेरिका में सोमोस संस्था टोल-फ्री नंबरों का पंजीकरण और प्रबंधन करती है। यह ऐसे नंबरों के संबंध में आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने में सक्षम है। ट्रेसबैक संस्था धोखाधड़ीपूर्ण कॉलों का स्रोत पता लगाने में सहयोग करती है। भारतीय एजेंसियों की जानकारी पर अमेरिकी प्राधिकरण इन संस्थाओं से विवरण लेकर कार्रवाई कर सकेगा।
दूसरी कंपनी के नाम से किराये पर ली थी जगह
जांच में पता चला कि कॉल सेंटर का किरायानामा सोलरिस सॉल्यूशन के बजाय एक्सिकॉम टेक्नोलॉजीज के नाम पर था। इसका स्वामित्व गिरफ्तार आरोपी नायकर जयराज से संबंधित है। पुलिस हवाला लेनदेन और धन के प्रवाह की गहनता से जांच कर रही है।
ठिकाने बदल रहा आरोपी
भागे चल रहे चार्ल्स की तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं, पर उसका सुराग नहीं मिला है। आरोपी की अंतिम लोकेशन मध्य प्रदेश में थी। सूत्रों के अनुसार, चार्ल्स लगातार ठिकाने बदल रहा है और उसे सर्विलांस के बारे में काफी जानकारी है। आशंका है कि वह नेपाल के रास्ते विदेश भाग सकता है। पुलिस का कहना है कि चार्ल्स का पता लगाने के लिए गिरफ्तार किए गए उसके करीबियों को रिमांड पर लिए जाएगा। आमने-सामने पूछताछ करने पर चार्ल्स के ठिकाने का पता चल सकेगा।