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लविवि: पोस्टर प्रजेंटेशन की मान्यता में अब नहीं फंसेगी थीसिस

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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय के बहुत से शोधार्थियों की थीसिस डीन के स्तर पर इसलिए नहीं फारवर्ड की जा रही थी क्योंकि उन्होंने इसमें अपनी थीसिस के साथ पोस्टर प्रजेंटेशन का प्रमाण लगाया था। इसकी गिनती नहीं की जा रही थी। लेकिन मंगलवार को पहले छात्रों ने इस मामले में डीन साइंस प्रो. बृजेंद्र सिंह और फिर कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय से मुलाकात की। इसके बाद इसका समाधान निकाला गया।
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जंतु विज्ञान विभाग के शोधार्थियों ने बताया कि उन्होंने अपनी थीसिस डीन के यहां जमा की थी और इसके सपोर्ट में अन्य कागजों के साथ सेमिनार व कांफ्रेंस में प्रस्तुत किए गए पोस्टर प्रजेंटेशन से संबंधित कागज लगाए थे जिसे डीन नहीं मान रहे थे। इसकी वजह से उनकी थीसिस काफी दिनों से फंसी हुई थी। उन्होंने बताया कि कई जगह पर कॉन्फ्रेंस में शोधार्थी अपना ओरल प्रजेंटेशन करते हैं तो कई जगह पर पोस्टर प्रजेंटेशन ही होता है। विवि के नियमों में भी इसे मान्यता दी गई है लेकिन उनकी थीसिस फंसी हुई थी। मंगलवार को इस मामले में छात्र पहले डीन से मिलने पहुंचे लेकिन डीन उनके तर्कों से नहीं संतुष्ट हुए। इसके बाद शोधार्थी कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय से मिलने गए। कुलपति ने डीन और हेड प्रो. एम सेराजुद्दीन को भी बुलाया और सभी के साथ इस पर वार्ता की। प्रो. राय ने बताया कि शोधार्थियों की बात सही थी और इसका समाधान निकाल दिया गया है और इससे संबंधित आदेश भी जारी कर दिया गया है।
वहीं रजिस्ट्रार संजय मेधावी की ओर से डीन साइंस को पत्र भेजकर कहा गया है कि विभिन्न शोध अध्यादेशों में प्रावधान है कि शोध ग्रंथ जमा करते समय शोधार्थी सेमिनार या कॉन्फ्रेंस में शोध पत्र प्रस्तुत करने के साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे। इसमें स्पष्ट किया जाता है कि सभी प्रकार के प्रस्तुतिकरण जैसे मौखिक, पोस्टर, ऑनलाइन या ऑफलाइन सभी माध्यम होंगे। विवि प्रशासन के इस मामले का निस्तारण करने से काफी शोधार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी।
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विद्यार्थियों की उपस्थिति का रखें रिकॉर्ड
लविवि प्रशासन की ओर से सभी डीन, हेड व निदेशकों को पत्र जारी कर कहा गया है कि समाज कल्याण विभाग द्वारा दशमोत्तर छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया को लेकर कई बदलाव किए गए हैं। साथ ही हर स्तर पर जवाबदेही निर्धारित की गई है। शासन की ओर से कुल क्लास के सापेक्ष 75 फीसदी अटेंडेंस अनिवार्य की गई है। इसे देखते हुए सभी की ओर से कक्षाओं व प्रत्येक छात्र की उपस्थिति आदि की विस्तृत जानकारी/रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। इसी के अनुसार छात्रवृत्ति व परीक्षा फार्म को अग्रसारित करें।
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