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ब्राह्मण कार्ड व कानून-व्यवस्था सहित कई मुद्दों का जमीनी ताप बताएगा यूपी का उपचुनाव, ये मुद्दे करेंगे प्रभावित

Sat, 24 Oct 2020 06:14 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रियंका गांधी, मुख्यमंत्री योगी व अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala
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उत्तर प्रदेश की सात विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान की तारीख ज्यों-ज्यों नजदीक आ रही है, सियासी गलियारों में इनके नतीजों को लेकर कयास तेज होते जा रहे हैं। इनका नतीजा सिर्फ जीत-हार ही नहीं बताएगा बल्कि कुछ मुद्दों का जमीनी ताप भी बताएगा। राजनीतिक दलों की जमीनी पकड़ व पहुंच का सच बताने के साथ ही उनके भविष्य की दिशा व दशा का संकेत भी देगा।

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दरअसल, उपचुनाव से पहले के तीन-चार महीनों में राजनीतिक घटनाक्रम काफी तेजी से बदला है। बिकरू कांड से लेकर बलिया और हाथरस से लेकर औरैया तक की घटनाओं को विपक्ष ने मुद्दा बनाने की कोशिश की है। सरकार के फैसलों के साथ अन्य कुछ घटनाक्रम का भी जमीनी असर उपचुनाव के परिणामों से पता चलेगा।

रोजगार: विपक्ष की तरफ से सरकार पर लोगों को रोजगार न दे पाने का आरोप लगाया जा रहा है तो सरकार की तरफ से आंकड़े देकर विरोधी दलों के आरोपों को असत्य साबित करने की कोशिश होती रही। उपचुनाव की घोषणा के साथ ही सरकार ने शिक्षकों को नियुक्ति पत्र देना शुरू कर विपक्ष के आरोपों को असत्य साबित करने की कोशिश की है। ऐसे में उपचुनाव के नतीजे सत्तापक्ष और विपक्ष की बातों का जनता में प्रभाव का संकेत देंगे।

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इन मुद्दों पर भी पता चलेगा रुझान

किसान: केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों को लेकर देश भर में सरगर्मी है। विपक्ष इन कानूनों को किसान विरोधी बता रहा है तो भाजपा की तरफ से इसे किसान हितैषी साबित करने की कोशिश हो रही है। किसानों के गुस्से को कम करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए। गेहूं सहित रबी की अन्य फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया गया। प्रदेश सरकार ने किसानों को अपनी उपज बेचने पर मंडी शुल्क से माफी दे दी। उपचुनाव के नतीजों से किसानों के रुख का भी संकेत मिलेगा।

नतीजों से मिलेगी हिंदुत्व की झलक
नतीजों से कहीं न कहीं हिंदुत्व की झलक भी मिलेगी। कारण, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की शुरुआत के बाद प्रदेश में पहली बार चुनाव हो रहे हैं। राम मंदिर प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा रहा है। लोग ये मानते भी हैं कि अयोध्या में मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने में भाजपा सरकार की भूमिका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुलंदशहर की सभा में हिंदुत्व के मुद्दे को धार देकर इस पर लोगों की नजरें टिका दी हैं।

ब्राह्मण उत्पीड़न का मामला उठाकर सरकार को घेरा

विपक्ष ने कानपुर के बिकरू कांड में पुलिस की भूमिका को लेकर तथा प्रयागराज, औरैया, एटा सहित अन्य कुछ स्थानों पर घटी घटनाओं के जरिये ब्राह्मण उत्पीड़न का मामला उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश की है।

सपा, कांग्रेस और बसपा ही नहीं, आम आदमी पार्टी तक ने भाजपा सरकार पर ब्राह्मण उत्पीड़न और इस समाज की उपेक्षा के आरोप लगाए हैं।

भाजपा की तरफ से इन आरोपों को गलत साबित करने के लिए न सिर्फ कई ब्राह्मण चेहरे आगे किए बल्कि तथ्यों व तर्कों के साथ प्रति आक्रमण भी किया है। उपचुनाव के नतीजों से ब्राह्मण कार्ड का जमीनी असर पता चलेगा और उसकी सियासी दिशा का भी संकेत मिलेगा।

हाथरस कांड की तपिश का असर देश की राजनीति पर पड़ा

हाथरस की घटना ने न सिर्फ प्रदेश की सियासत को काफी गरमाया, बल्कि इसकी तपिश का असर देश की राजनीति पर भी दिखाई दिया। विपक्ष ने इस घटना को अनुसूचित जातियों के सम्मान, स्वाभिमान और संवेदनाओं से जोड़कर मुद्दा बनाने की कोशिश कर सरकार को घेरने की कोशिश की।

वहीं, सरकार ने विपक्ष की भूमिका को कठघरे में खड़ा करने के साथ दोषियों पर कार्रवाई करके विपक्ष के आरोपों को गलत साबित करने का प्रयास किया। पर, विपक्ष की तरफ से हाथरस की घटना में विरोधी दलों के नेताओं और मीडिया के साथ प्रशासन के व्यवहार को मुद्दा बनाने की कोशिश हो रही है।

रालोद नेता जयंत चौधरी पर पुलिस के लाठीचार्ज के सहारे पश्चिम की सीटों पर जाटों की संवेदनाओं के सहारे सियासी समीकरण साधने की कोशिश हो रही है। उपचुनाव वाली कुछ सीटों पर न सिर्फ जाट अच्छी संख्या में हैं बल्कि अनुसूचित जातियों के वोट भी अच्छी संख्या में हैं।
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बलिया कांड पर भी सरकार को घेर रहा है विपक्ष

बलिया कांड को लेकर भी विपक्ष लगातार मुद्दा बनाकर सरकार को सियासी तौर पर घेर रहा है। हालांकि मुख्य आरोपी धीरेंद्र सिंह की गिरफ्तारी हो चुकी है लेकिन विपक्ष की तरफ से इस घटना के सहारे बांगरमऊ, टूंडला और घाटमपुर जैसी सीटों पर पिछड़े वोटों खासतौर से पाल मतदाताओं की गोलबंदी की कोशिश भी एक बड़ा फैक्टर बन गई है।
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