उत्तरप्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सत्ता में आते ही जब ताबड़तोड़ फैसले लेने शुरू किए थे तो उनकी हिन्दू कट्टरवादी छवि पर सवाल उठने लगे थे। लोगों का कहना था कि हिंदू छवि के चलते सीएम योगी दूसरे धर्मों के लोगों के संग इंसाफ नहीं कर पाएंगे।
अवैध बूचड़खाने बंद करने के फैसले से जब वैध बूचड़खाने भी बंद हुए तो मुस्लिम वर्ग ने तो यहां तक कहना शुरू कर दिया था कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है, पर ऐसा नहीं था।
हिन्दू कट्टरवादी छवि को बदलने के लिए योगी आदित्यनाथ ने सबका साथ सबका विकास की नीति पर अमल करना शुरू कर दिया है। बीते दिन बैसाखी पर सीएम योगी ने लखनऊ स्थित यहिया गंज गुरुद्वारे में मत्था टेका।
यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सौभाग्य है कि गुरुद्वारे में गुरु तेग बहादुर और गुरु गोविंद सिंह भी यहियागंज गुरुद्वारे में आए हैं। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर के बारे में पढ़ता हूं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
उस समय भी कश्मीर में पंडितों पर अत्याचार हो रहा था, यातनाएं दी जा रही थी। औरंगजेब का सभी कश्मीरी पंड़ितों का धर्मांतरण का फरमान था। गुरु तेग बहादुर के पास इस बात को लेकर पंडित गए तो गुरू तेग बहादुर ने कहा कि जाओ बादशाह को बता दो कि यदि हमारे गुरू इस्लाम स्वीकार कर लेंगे तो हम भी कर लेंगे।
सिख धर्म गुरुओं ने कितनी यातनाएं सही है, दिल्ली का शीशगंज गुरूद्वारा इसका गवाह है। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव से गुरु गोविंद सिंह तक चली यह परम्परा भक्ति से शक्ति का पूंज बनकर उभरी है। सिख पंथ की इस परम्परा को और भी आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।