बदायूं सीट पर अभी मुलायम के भतीजे धर्मेंद्र यादव सांसद हैं। इस बार भी सपा से वही चुनाव मैदान में हैं। यहां भाजपा सिर्फ एक बार 1998 में जीत हासिल कर पाई है। मुलायम परिवार के कब्जे वाली दूसरी सीट कन्नौज में भी भाजपा सिर्फ एक बार 1996 में अपना परचम फहरा पाई है।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की सीट अमेठी में भी भाजपा एक बार 1998 में ही जीत पाई। वह भी तब, जब अमेठी राजघराने के संजय सिंह कांग्रेस छोड़ भाजपा के टिकट पर यहां से लड़े। आजमगढ़ में भी सिर्फ एक बार 2009 में भाजपा का परचम फहरा, जब पूर्वांचल के दबंग चेहरे रमाकांत यादव यहां कमल खिलाने उतरे।
रायबरेली सीट पर भाजपा वैसे तो दो बार जीत हासिल कर चुकी है, पर 2014 में मोदी लहर भी उसे यहां जीत नहीं दिला पाई। साफ है कि भाजपा को इन सीटों पर जीत के लिए कड़ी चुनौती से पार पाना होगा।
पश्चिमी यूपी के मुरादाबाद और संभल तथा मध्य यूपी में कानपुर के बगल अकबरपुर में भाजपा 2014 में ही जीत पाई। पूर्वांचल के फूलपुर, अंबेडकरनगर, लालगंज, घोसी, सलेमपुर और बलिया में भी पिछले लोकसभा चुनाव में ही पहली बार कमल खिला था।
फूलपुर में भाजपा के केशव प्रसाद मौर्य ने जीत हासिल की थी। हालांकि उनके उप मुख्यमंत्री बनने के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा को पराजय का सामना करना पड़ा। ऐसे में इन नौ सीटों पर भाजपा को कड़ा मुकाबला करना पड़ सकता है।
शाहजहांपुर : 1998 व 2014
मिश्रिख : 1996 व 2014
रायबरेली : 1996 व 1998
प्रतापगढ़ : 1998 व 2014 में अपना दल
इटावा : 1998 व 2014
बाराबंकी : 1998 व 2014
भाजपा को एक बार मिली जीत
बदायूं : 1991
अमेठी : 1998
कन्नौज : 1998
आजमगढ़ : 2009
मुरादाबाद, संभल, अकबरपुर, फूलपुर, अंबेडकरनगर, लालगंज, घोसी, सलेमपुर और बलिया।