टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों ने दी आंदोलन की चेतावनी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक शिक्षकों ने पुरानी नियुक्तियों पर टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। शुक्रवार को शिक्षक सहकारी समिति भवन डालीगंज में हुई बैठक में विभिन्न शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले राष्ट्रव्यापी आंदोलन की घोषणा की।
बैठक में उत्तर प्रदेश जूनियर शिक्षक संघ, प्राथमिक शिक्षक संघ, अटेवा, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक एसोसिएशन, और टीएससीटी सहित दर्जनों संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि नियुक्ति के समय शिक्षक सभी निर्धारित योग्यताएं पूरी करते थे, ऐसे में अब टीईटी थोपना उनके अस्तित्व पर हमला है।
महासंघ ने सरकार को घेरने के लिए चरणबद्ध आंदोलन का खाका तैयार किया है। प्रथम चरण के तहत नौ से 15 मार्च राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश और मुख्यमंत्री को पत्र भेजेंगे। द्वितीय चरण में 13 अप्रैल को जिला स्तर पर हक की रक्षा के लिए प्रदर्शन करेंगे। तृतीय चरण में तीन मई को राजधानी में शक्ति प्रदर्शन होगा। चतुर्थ चरण मानसून सत्र संसद के दौरान अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
बैठक में शामिल विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिला संयोजक विनीत कुमार सिंह ने कहा कि यह कोई भीख नहीं, हमारा अधिकार है। नियुक्ति के समय हम पात्र थे, आज अपात्र कहना गलत है। एसोसिएशन के प्रतिनिधि सुरेश जायसवाल व वीरेंद्र सिंह ने कहा कि सड़क से लेकर सदन तक शिक्षकों के हितों की रक्षा की जाएगी। बैठक में बृजेश मौर्य, संजय मौर्य, अशोक यादव, अश्वनी गुर्जर और वेद प्रकाश सरोज सहित भारी संख्या में शिक्षक नेता मौजूद रहे।