लखनऊ। केजीएमयू में वर्ष 2023 में हुई नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में अनियमितताओं की एसटीएफ जांच के साथ अब विभागीय जांच भी होगी। शासन ने चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशक (डीजीएमई) को पत्र भेजकर जांच आगे बढ़ाने और आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
भर्ती में दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों के अधिक चयन और कई अभ्यर्थियों के एक ही कोचिंग सेंटर से जुड़े होने के आरोप लगे हैं। मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से किए जाने के बाद एसटीएफ को जांच सौंपी गई थी।
विभागीय जांच की मांग पर प्रमुख सचिव के निर्देश पर डीजीएमई नेहा शर्मा ने छह अक्तूबर को तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। हालांकि, 14 अक्तूबर को उन्होंने एसटीएफ जांच का हवाला देते हुए अलग से विभागीय जांच को उचित नहीं बताया था। अब 29 अक्तूबर को पत्र भेजकर शासन ने स्पष्ट किया है कि एसटीएफ जांच के साथ विभागीय जांच भी कराई जा सकती है। शासन ने आवश्यक कार्रवाई कर रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
पूर्व विधायक ने मुख्यमंत्री को सौंपा पत्र
मिल्कीपुर के पूर्व विधायक गोरखनाथ बाबा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र सौंपकर केजीएमयू में भर्ती और सेवा संबंधी अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने वर्ष 2023 की नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में एसटीएफ जांच के साथ विभागीय जांच कराने की अपील की।
उन्होंने तत्कालीन कुलसचिव अर्चना गहरवार के पत्रों का हवाला देते हुए वर्ष 2023 से 2025 के बीच हुई अन्य गैर-शैक्षणिक भर्तियों की भी जांच कराने की मांग की। साथ ही कुलपति के ओएसडी सैयद अख्तर अब्बास और अन्य तदर्थ कर्मचारियों को नियमितीकरण के बिना स्थायीकरण, पदोन्नति व अन्य सेवा लाभ दिए जाने के मामले में कार्रवाई का अनुरोध किया।