लखनऊ। आज भी गिरमिटिया मजदूरों ने अपने स्व, भाषा, बोली और संस्कृति को नहीं छोड़ा है। ऐसे में हर विश्वविद्यालय में गिरिमिटिया अध्ययन केंद्र का होना बहुत जरूरी है। ये बात पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने कही। मौका था शनिवार को लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रवासी भारतीय दिवस व विश्व हिंदी दिवस के मौके पर ''हिंदी का प्रवासी व प्रवासी की हिंदी'' विषय पर आयोजित गोष्ठी का।
केंद्रीय प्रकाशन विभाग पूर्व निदेशक अरुण कुमार सिन्हा ने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपना घर छोड़कर दूर देश जाता है तो वह अपनी भाषा और संस्कृति भी साथ ले जाता है। प्रवासी हिंदी उस स्मृति की भाषा है जो गिरमिटिया लोगों के साथ उनके आंसुओ, संघर्षों और रामचरितमानस के साथ निर्मित हुई। गृह मंत्रालय राजभाषा की सहायक निदेशक डॉ. भावना सक्सेना ने बताया कि अभिलेखागार में संकलित चिट्ठियों में प्रवासियों के दुख दर्ज हैं। सहकारिता विभाग के निदेशक मनोज कुमार द्विवेदी, वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष शुक्ल, बीएचयू के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डॉ. ज्ञान प्रकाश मिश्रा, प्रो. गंगा प्रसाद शर्मा गुणशेखर, प्रो. नरेंद्र मिश्र, प्रो. पुनीत मिश्रा, डॉ. पूर्णिमा वर्मन ने अपने विचार रखे। समापन सत्र में मुख्य अतिथि पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय, प्रो. अनिल शुक्ल, अपर पुलिस आयुक्त जितेंद्र कुमार दूबे मौजूद रहे।
इन्हें मिला सम्मान
विश्व हिंदी दिवस पर हिंदी विभाग में अध्ययनरत विदेशी छात्रों को सम्मानित भी गया। इनमें हिंदी डिप्लोमा के छात्र जोहानस हॉफमैन (जर्मनी), हिंदी में परास्नातक की छात्राएं अन्ना नोविका (पोलैंड), खनिफा सैदोवा (ताजिकिस्तान), पीएचडी हिंदी में नामांकित शोधार्थी आनंदा अबेसुंदरा (श्रीलंका), अंजना मुथु (श्रीलंका), कलनी पनागोडा (श्रीलंका), कंचना डी एलविस (श्रीलंका)।
लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रवासी भारतीय दिवस व विश्व हिंदी दिवस के मौके पर हुई गोष्ठी।
लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रवासी भारतीय दिवस व विश्व हिंदी दिवस के मौके पर हुई गोष्ठी।
लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रवासी भारतीय दिवस व विश्व हिंदी दिवस के मौके पर हुई गोष्ठी।
लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रवासी भारतीय दिवस व विश्व हिंदी दिवस के मौके पर हुई गोष्ठी।
लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रवासी भारतीय दिवस व विश्व हिंदी दिवस के मौके पर हुई गोष्ठी।
लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रवासी भारतीय दिवस व विश्व हिंदी दिवस के मौके पर हुई गोष्ठी।
लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रवासी भारतीय दिवस व विश्व हिंदी दिवस के मौके पर हुई गोष्ठी।
लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रवासी भारतीय दिवस व विश्व हिंदी दिवस के मौके पर हुई गोष्ठी।
लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रवासी भारतीय दिवस व विश्व हिंदी दिवस के मौके पर हुई गोष्ठी।