लखनऊ। दिवंगत रंगकर्मी और नौटंकी लेखक उर्मिल कुमार थपलियाल की लिखी नौटंकी- मो सम पुरुष न तुम सम नारी का मंचन बुधवार को संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगे जी महाराज प्रेक्षागृह में हुआ। स्वांग के साथ मिश्रित शैली में पेश की गई नौटंकी ने समाज के तमाम पहलुओं को छुआ। निर्देशन सरिता यादव का रहा। उन्होंने बताया कि इस नौटंकी को पेश करने का मुख्य उद्देश्य इस विलुप्त हो रही विधा को फिर से दर्शकों के बीच लाना और इसे बचाना है।
शुरुआत आरती-जय हो जय हो भरत मुनि की... से हुई। इसके बाद रंगा और छंगा नाम के सूत्रधारों ने- आवा सभी मिली खेलि दिखावहि... के जरिये लोगों को नौटंकी का पारंपरिक रूप दिखाते हुए कहानी को आगे बढ़ाया। नौटंकी में बलई नाम के एक व्यक्ति की कहानी दिखाई गई जो आलसी और कामचोर है। उसके बड़बोलेपन में एक दिन रामकली उसकी बातों में आ जाती है।
इसके बाद बलई के झूठ-मूठ में मरने और श्मशान घाट में चोरों के बीच धन के बंटवारे जैसी कहानियों ने लोगों का अच्छा मनोरंजन किया और वाहवाही बटोरी। वहीं जापर जाको सत्य सनेहू, खेत जमीन बैल सब बिकिगै, बलई राम मुंहझौसा जैसे गीतों ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। मंच पर धीरेंद्र, अभय, बृजेश, सरिता समेत अन्य कलाकारों ने शानदार अभिनय किया।