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Lucknow News: डफरिन अस्पताल के मिल्क बैंक शुरू होने में फंसा अड़ंगा

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डफरिन अस्पताल।
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लखनऊ। डफरिन अस्पताल में प्रस्तावित राजधानी का का दूसरा ह्यूमन मिल्क बैंक'' (मिल्क बैंक) शुरू होने से पहले ही अधर में लटक गया है। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के माध्यम से संसाधन मुहैया कराने का दावा तो किया गया, लेकिन बजट की कमी और कुछ महत्वपूर्ण उपकरणों की अनुपलब्धता के कारण यह प्रोजेक्ट परवान नहीं चढ़ पा रहा है। इसका सीधा खामियाजा उन नवजात बच्चों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें समय पर मां का दूध नहीं मिल पाता।
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324 बेड की क्षमता वाले डफरिन अस्पताल में रोजाना 25 से 30 प्रसव होते हैं। इनमें से करीब 12 से अधिक सिजेरियन केस होते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, सिजेरियन या प्री-मैच्योर डिलीवरी के मामलों में मां को दूध आने में 3-4 दिन का समय लगता है। मिल्क बैंक न होने के कारण इन बच्चों को मजबूरी में डिब्बाबंद दूध दिया जा रहा है, जो उनके स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए मां के दूध जैसा लाभकारी नहीं होता।
अस्पताल के सिक्ड न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) के पास ही इस मिल्क बैंक को स्थापित किया जाना है। अस्पताल की प्रमुख अधिक्षिका डॉ. ज्योति मेहरोत्रा ने बताया कि मिल्क बैंक के लिए कुछ बजट और जरूरी उपकरणों का इंतजार है। संसाधन उपलब्ध होते ही अगले एक से डेढ़ महीने के भीतर इसकी शुरुआत कर दी जाएगी।
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