भारतीय संस्कृति से जुड़े संग्रहालयों पर विचार मंथन सत्र में चर्चा करते स्वामी रामदेव, आचार्य बा
लखनऊ। भारतीय संस्कृति और विरासत को संजोए संग्रहालय पर संगोष्ठी में स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत के गौरवशाली अतीत को जानबूझकर हाशिए पर डालने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि देश की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने और सुरक्षित रखने में पतंजलि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विचार सत्र के आरंभ में आचार्य बालकृष्ण ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के सार को केवल पारंपरिक ऐतिहासिक आख्यानों से पूरी तरह से नहीं समझा जा सकता, बल्कि इसे वैश्विक सभ्यतागत परिप्रेक्ष्य से समझा जाना चाहिए।
एक दिवसीय विचार-मंथन सत्र का आयोजन बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (बीएसआईपी), लखनऊ ने पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन ट्रस्ट (पीआरएफटी) और पतंजलि विश्वविद्यालय (यूओपी), हरिद्वार के सहयोग से किया। बीएसआईपी के निदेशक प्रोफेसर महेश जी ठक्कर ने एक अत्याधुनिक संग्रहालय की अवधारणा पेश की। उन्होंने भारत की वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत पर एक व्यापक और एकीकृत दृष्टिकोण प्रदान करने की इसकी क्षमता पर बात की, जिससे मौजूदा ऐतिहासिक विवरणों में महत्वपूर्ण अंतराल को पाटा जा सके।