रायबरेली। इन दिनों जिले में लापरवाह पुलिसिंग के चलते चोरों हौसले बुलंद हैं। हालत ये है कि रात के समय घड़ी की सुई नौ बजाती है तो गुरुबख्शगंज थाना क्षेत्र के ग्रामीण रात्रि गश्त पर निकल पकड़ते हैं। रोज रात को लोगों की नींद उड़ी रहती है कि चोर कहीं वारदात को अंजाम न दे दें। गांवों के लोगों में चोरों का जिस तरह खौफ है, उस तरह की स्थिति एक दशक पहले ज्यादा हुआ करती थी।
लोग पुराने दिनों को याद करते पुलिसिंग सिस्टम को कोस रहे हैं। जिले में रोज कहीं न कहीं चोरी की घटना आम बात हो गई है। एक माह में 42 से ज्यादा चोरियां हो चुकी हैं। खासकर गुरुबख्शगंज, लालगंज और बछरावां कोतवाली क्षेत्रों के गांवों में ज्यादा चोरी की घटनाएं हो रही हैं। ऐसे में लोगों ने खुद और घरों की सुरक्षा के लिए गांवों में पहरा लगाना शुरू किया है।
सतांव प्रतिनिधि के मुताबिक बंडे और खगियाखेड़ा गांव में ग्रामीण चोरों के डर के चलते रात में पहरा लगा रहे हैं। बंडे गांव निवासी आनंद मिश्रा, कृष्ण पुर ताला गांव निवासी मुकेश, ठकुराइन खेड़ा गांव निवासी अनुराग कमल कहते हैं कि चोरों के आतंक से रात में सोना मुश्किल है। हम लोग तो पहरा लगाने चले जाते हैं और उनके घर के लोग जागकर रात बिता रहे हैं। यह हालात काफी दिनों बाद हुए हैं। क्षेत्रीय पुलिसिंग व्यवस्था मजाक बन गई है। गांवों में जागत रहो, सोवत रहो के नारे लग रहे हैं।
बछरावां प्रतिनिधि के मुताबिक रायबरेली-उन्नाव बार्डर पर सई नदी किनारे बसे उंदा खेड़ा, उदहरा, दैजुवा खेड़ा, मैना हार कटरा गांव के लोग चोरों की घटनाओं से भयभीत हैं। इन गांवों के लोग भी रात में पहरा लगाने को मजबूर हैं। लालगंज क्षेत्र में भी कमोवेश यही स्थिति है।
पुलिसिंग हो रही फेल और थाना प्रभारी भी लापरवाह
जिले में बढ़ती चोरी की घटनाओं की मुख्य वजह पुलिसिंग व्यवस्था बेहतर न होना है। चोरों पर नजर रखने के लिए गठित की गई एसओजी व सर्विलांस टीम दफ्तर में ही बैठकर अपराधियों को पकड़ने और मोबाइल बरामद करने तक सीमित रह गई है। सूचनातंत्र मजबूत न होने के कारण चोर पुलिस पर भारी पड़ रहे हैं। थाना प्रभारियों की गश्त करने में ढिलाई भी चोरी की घटनाएं बढ़ने की वजह है।