लोकतंत्र का जीता जागता जादू बन चुके मनोनीत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सक्सेस यात्रा को मंच पर उतारने की तैयारी है।
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मोदी मंच पर उतरेंगे और लोग उनकी सक्सेस यात्रा से रू-ब-रू होंगे। सत्य घटनाओं पर नाटक करने वाले नगर के युवा रंगकर्मी मुकेश वर्मा अपने एक मंचन में मोदी और उनके निजी जीवन से जुड़े कुछ पहलुओं को भी उकेरेंगे।
मंचन के मुख्य किरदार (योगी) को नरेंद्र मोदी सा ही स्वरूप दिया गया है, जो विवाह के बाद पत्नी को छोड़कर देश सेवा और मानव सेवा के मार्ग पर निकल पड़ता है।
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नाटक ‘यशोदाबेन’ मंचन जुलाई के पहले सप्ताह में लखनऊ के कैसरबाग स्थित एक प्रेक्षागृह में नई सरकार के बजट के समय के आसपास सात जुलाई को किए जाने की तैयारी है।
राष्ट्रनिर्माण के पथ पर मोदी
युवा रंगकर्मी मुकेश शर्मा ने बताया कि मंचन में एक पुरानी गाथा के जरिए एक जाति विशेष के युवक को देश और मानव सेवा के लिए राष्ट्र निर्माण पथ पर निकलता दिखाया जाएगा।
करीब पांच शताब्दियों पुराने कथानक में वो अपनी नवविवाहिता पत्नी (यशादाबेन) को भी छोड़ता है।
लंब संघर्षों के बाद वो नरेन्द्रगढ़ का राजा बनता है और देश सेवा के लिए जुटता है, तब बीते हुए लम्हों से उसका आमना-सामना होता है।
90 मिनट का होगा नाटक
लगभग 90 मिनट के इस मंचन का निर्देशन मुकेश वर्मा कर रहे हैं। मंचन के लिए 100 और 200 रुपये का टिकट भी रखा गया है।
मंचन के लिए दाढ़ी रखने वाले किरदार का तलाशा जा रहा है। रंगकर्मी के मुताबिक, मंचन को बाद में यू-ट्यूब पर भी अपलोड किया जाएगा, ताकि लोग सफलता की यात्रा को देख सकें।
मंचन का क्लाइमेक्स रोचक रखते हुए गोपनीय रखा जा रहा है, सूत्रों की मानें तो ये हर बार की तरह हैप्पी एंडिंग से अलग हो सकता है।
अखिलेश और माया भी बन चुके हैं किरदार
माई सैंडिल, अन्ना मेरा बाप, क्षमा करो हे वत्स, रैगिंग, सत्याग्रह जैसे सत्य घटनाओं पर आधारित मंचन कर चुके मुकेश अपने मंचनों से विवादित भी रहे हैं।
2012 के विधानसभा चुनावों के दौरान बसपा सुप्रीमो मायावती पर आधारित नाटक माई सैंडिल करने के चक्कर में उन पर प्रतिबंध भी लग चुका है।
उनके मंचनों में सूबे की पूर्व सीएम मायावती, सीएम अखिलेश के किरदार भी मंच पर उतर चुके हैं।
दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के आम आदमी से मुख्यमंत्री बनने के सफर को अपने एक मंचन ‘बोरे में आदमी’ उकेरने का रंगर्मी का प्रयास विफल हो चुका है।
सरकार बनने के बाद रंगकर्मी केजरीवाल की पूरी कहानी को मंच पर उतारने की तैयारी में थे, रिहर्सल भी जारी थी। रंगकर्मी की मानें तो उसके बाद महज 49 दिनों में सरकार गिरने के बाद मंचन स्थगित करना पड़ा।