रंगमंच के पुरोधा बंसी कौल नहीं रहे। दिल्ली में शनिवार सुबह उन्होंने अंतिम सांसें लीं। उनके निधन पर शहर के रंगकर्मियों ने दुख जताया है।
70 से 80 के दशक में बंसी कौल ने दर्पण रंगमंच संस्था के साथ कई यादगार नाट्य मंचनों से नगर को रूबरू कराया।
बंसी कौल के साथ कई वर्षों तक काम करने वाले रंगकर्मी अभिनेता डॉ. अनिल रस्तोगी ने बताया कि 1973 में एनएसडी से पास आउट होने के बाद उन्हें दर्पण के साथ संस्थापक सत्यमूर्ति ने एक मंचन में प्रकाश के लिए बुलाया था।
उसके बाद वे हमसे जुड़ गए। करीब दर्जन भर से अधिक मंचन किए। बीएनए में भीवे अतिथि शिक्षक के तौर पर आते रहे। रंगमंच का कद्दावर नाम होने के बाद वे कभी छोटे काम को लेकर पीछे नहीं हटते।
मंच सज्जा हो या कील लगाने जैसा भी छोटा काम वे खुद ही कई बार इसमें लग जाते थे। लॉकडाउन से पहले आखिरी बार वे वर्ष 2019 में नगर में एक मंचन समारोह में आए थे। खामोश अदालत जारी है, आला अफसर, मदर, सिंहासन खाली है समेत कई चर्चित मंचनों में उन्होंने निर्देशन किए।
मंचन में बॉडी मूवमेंट पर देते थे जोर
वरिष्ठ रंगकर्मी आत्मजीत सिंह ने बताया कि एनएसडी से पास होकर जब वे 70 के दशक में लखनऊ आए तो यहां के रंगमंच से जुड़े। अगले कई बरसों तक आते-जाते रहे, मंचन करते रहे। आला अफसर उनका निर्देशित किया ऐसा मंचन रहा, जिसमें डॉ. अनिल रस्तोगी, विजय, पीडी वर्मा, स्वदेश बंधु, शबा जैदी, शोभना जगदीश ने अभिनय किया था। वह मूवमेंट बहुत करवाते थे, मंचन में शारीरिक हरकतों को बहुत तरजीह देते थे। लखनऊ में खास किस्म की बिरयानी उनकी पसंदीदा थी।