लखनऊ। केजीएमयू में लाखों खर्च कर लगाए सोलर पैनलों के काम न करने के मामले को कुलपति ने गंभीरता से लिया है। संस्थान के बिजली विभाग के इंजीनियरों से 72 घंटे में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आरोप है इन्हीं इंजीनियरों की लापरवाही से अधिकतर सोलर पैनल वर्षों से बंद पड़े हैं।
केजीएमयू में 53 भवनों पर सोलर पैनल लगे हैं। वर्ष 2010-12 में राजकीय निर्माण निगम के कुछ भवनों पर पैनल लगाए गए। इसके बाद वर्ष 2016 में नेडा के जरिये अन्य विभागों में सोलर पैनल लगाए गए। ये सभी सोलर पैनल बंद पड़े हैं। आरोप है कि लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए इन सोलर पैनलों को बिजली विभाग के इंजीनियर ठीक तक नहीं कर रहे हैं। इस कारण इक्का-दुक्का विभागों की इमारतों में लगे पैनल ही बिजली बना रहे हैं।
लापरवाही का आलम यह है कि अधिकतर पैनलों को अभी तक बिजली ग्रिड से भी नहीं जोड़ा गया है। इससे विश्वविद्यालय को हर माह लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। ट्रॉमा सेंटर, शताब्दी फेज-दो, नई व पुरानी ओपीडी, कलाम सेंटर, एनॉटॉमी, परीक्षा भवन, छात्रावासों, मानसिक रोग, लारी समेत अन्य महत्वपूर्ण भवनों पर लगे सोलर पैनलों से बिजली उत्पादन नहीं हो रहा है।
लेसा अधिकारियों के मुताबिक केजीएमयू में सोलर पैनल के 18 कनेक्शन बिजली विभाग से पंजीकृत हैं। इनमें से सात कनेक्शन ही सक्रिय हैं। बंद पड़े 11 कनेक्शनों को अभी तक इंजीनियरों के जरिये जुड़वाया तक नहीं गया। इस मामले को अमर उजाला ने मंगलवार के अंक में प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने पूरे मामले में संस्थान के बिजली विभाग के इंजीनियरों से रिपोर्ट मांगी है। इसके बाद लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की संस्तुति होगी।