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Lucknow News: जो बच्चे मंच से कतराते थे, वही बने शाम के सितारे

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कार्यशाला के समापन पर प्रस्तुति देते कलाकार। 
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लखनऊ। भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की ग्रीष्मकालीन कार्यशाला के समापन-प्रदर्शन के पहले दिन बुधवार को कला के साथ आत्मविश्वास की ऐसी कहानी भी सामने आई, जिसने दर्शकों को भावुक कर दिया। जो बच्चे कभी मंच पर आने से झिझकते थे, उन्होंने अपनी प्रस्तुति से न केवल तालियां बटोरीं, बल्कि कार्यक्रम के सबसे चर्चित सितारे भी बन गए। शास्त्रीय संगीत, नृत्य और वाद्य प्रस्तुतियों के बीच विशेष (ऑटिस्टिक) बच्चों के प्रदर्शन ने विशेष छाप छोड़ी।
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विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय समापन प्रदर्शन कार्यक्रम के प्रथम दिवस का शुभारंभ कुलपति प्रो. मांडवी सिंह और पूर्व कुलपति प्रो. पूर्णिमा पांडेय ने किया।
आत्मविश्वास की उड़ान ने खींचा ध्यान

कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरक क्षण तब आया जब विशेष (ऑटिस्टिक) बालिका सिद्धि शर्मा ने पहाड़ी लोकनृत्य प्रस्तुत किया। वहीं कथक में मीशा सिंह और भरतनाट्यम में रिदम सरकार ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया। उनकी प्रस्तुति में आत्मविश्वास, लय और भावों का सुंदर समन्वय दिखाई दिया। अभिभावकों ने बताया कि संगीत और नृत्य प्रशिक्षण से बच्चों में सकारात्मक बदलाव आया है। जो बच्चे पहले सामाजिक गतिविधियों से दूरी बनाते थे और मंच पर आने में संकोच करते थे, वे अब पूरे आत्मविश्वास के साथ दर्शकों के सामने प्रस्तुति दे रहे हैं। उन्होंने इसके लिए विश्वविद्यालय के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
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संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों ने बांधा समा
कार्यक्रम में शास्त्रीय गायन, सुगम संगीत, लोकनृत्य, कथक, भरतनाट्यम तथा विभिन्न वाद्य यंत्रों की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। प्रशिक्षक अभिषेक कुमार त्रिपाठी के निर्देशन में शास्त्रीय गायन, नमन सिंह के निर्देशन में सुगम संगीत तथा मोहित कपूर के निर्देशन में लोकनृत्य की प्रस्तुतियों को खूब सराहना मिली। तुषार सहाय (तबला), भानु बनर्जी (वायलिन), गौरव सिंह (गिटार), आशु कान्ति सिन्हा (बांसुरी), कृष्ण कुमार मौर्य (हारमोनियम) और शिवम पांडेय (की-बोर्ड) के निर्देशन में प्रतिभागियों ने अपनी साधना और कौशल का शानदार प्रदर्शन किया।

कथक और भरतनाट्यम की बिखरी छटा

कथक नृत्य में रिनी भारद्वाज और जयशिका सिंह तथा भरतनाट्यम में वैष्णवी मिश्रा के निर्देशन में विद्यार्थियों ने आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। हर प्रस्तुति में प्रतिभागियों की मेहनत, अनुशासन और कलात्मक परिपक्वता साफ नजर आई। कार्यक्रम में कुलसचिव एस.पी. सिंह, विभागाध्यक्ष मनोज कुमार मिश्र, ज्ञानेंद्र दत्त बाजपेई, सहायक आचार्य मंजुला पंत समेत बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।

कार्यशाला के समापन पर प्रस्तुति देते कलाकार। 

कार्यशाला के समापन पर प्रस्तुति देते कलाकार। 

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