झिमिटी खेला नाटक का मंचन करते कलाकार।
लखनऊ। एक छोटा सा मजाक, घायल अहंकार और फिर हड्डियों के पासों से बुना गया प्रतिशोध का वो जाल, जिसने पूरे कुरु वंश को राख कर दिया। गोमतीनगर सि्थत संगीत नाटक अकादमी में बृहस्पतिवार को जब ''झिमिटी खेल'' का मंचन हुआ तो दर्शकों ने महाभारत की उस अनकही गाथा को देखा जहां शब्दों के घाव हथियारों से भी ज्यादा गहरे साबित हुए। ओडिया महाकवि सरला दास की महाभारत पर आधारित इस नाटक ने दिखाया कि कैसे एक ''मामूली खेल'' महाविनाश की नींव रख सकता है।
संत गाडगे प्रेक्षागृह में भारतेंदु नाट्य अकादमी और स्पेस अकादमी के तत्वावधान में नाटक ''''झिमिटी खेल'''' का मंचन किया गया। प्रख्यात निर्देशक सत्यब्रत राउत के निर्देशन में युवा कलाकारों ने भारतीय पारंपरिक नाट्य विधाओं और प्रासंगिकता को एक नया रंग दिया। कलाकार जब ओडिशा की समृद्ध लोक परंपराओं, छाऊ नृत्य की ऊर्जा और पट्टचित्र की कलात्मकता के बीच जब महाभारत के पात्र मंच पर उतरे, तो इतिहास जीवंत हो उठा। नाटक ने महाभारत अनकही गाथा को उजागर किया। इसमें दिखा कि कैसे अपमान की आग ने विनाश की नींव रखी।
कहानी तब शुरू होती है जब धृतराष्ट्र पांडवों को इंद्रप्रस्थ भेज देते हैं। कुरु सभा में दुर्योधन द्वारा पांडवों को उनके ''दैवीय जन्म'' का हवाला देकर अपमानित करने पर, भीम कृष्ण की सलाह पर दुर्योधन को ''गोलक-पुत्र'' (गूलर के पेड़ का पुत्र) कहकर पलटवार करते हैं। यह रहस्य गांधारी के अतीत से जुड़ा है, जिसने दुर्योधन के अहंकार को चकनाचूर कर दिया। इसी प्रतिशोध की ज्वाला में गांधार नरेश और उनके 100 पुत्रों को भूखा रखकर मार दिया गया। संगीत और गायन पक्ष ने भी समा बांधे रखा, जिसमें सूर्यांशु राहुल, निहारिका कश्यप और तनुजा गोस्वामी की मुख्य भूमिका रही। कोरियोग्राफी गुरु सदाशिव प्रधान ने की।
नाटक के मुख्य कलाकार और उनकी भूमिका
धृतराष्ट्र-रोहित शर्मा
दुर्योधन-अभिषेक गुप्ता
कृष्ण-अंतरा मुखर्जी
भीम-लक्ष्य आनंद
शकुनि-प्रवीन कुमार
कुंती-चिन्मयी डोलस
झिमिटी खेला नाटक का मंचन करते कलाकार।
झिमिटी खेला नाटक का मंचन करते कलाकार।
झिमिटी खेला नाटक का मंचन करते कलाकार।