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Lucknow News: समय पूर्व जन्मे नवजात के लिए वरदान है सौर की परंपरा

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डॉ. शालिनी त्रिपाठी।
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लखनऊ। केजीएमयू की बाल रोग विशेषज्ञ प्रो. शालिनी त्रिपाठी के मुताबिक, भारतीय परंपरा में प्राचीन काल से अपनाई गई ‘सौर’ की परंपरा समय पूर्व जन्मे बच्चों के लिए वरदान है। इसमें मां और बच्चे को एक एकांत कमरे में शुरुआती कुछ दिनों तक रखा जाता है। इससे संक्रमण का खतरा कम हो जाता है। डॉ. शालिनी त्रिपाठी ने नवजात सुरक्षा के तहत ये जानकारी दी।
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डॉ. शालिनी त्रिपाठी ने कहा कि सौर की परंपरा थी बेहद सही थी। एक साफ-सुथरे कमरे में मां और बच्चे को एक महीने तक आराम दिया जाता था, बाहर वालों की आवाजाही सीमित रहती थी। इससे बच्चा सुरक्षित रहता था और मां को पर्याप्त आराम भी मिलता था। अब इस परंपरा का पालन नहीं किया जाता है। इसलिए मां और बच्चे के पास हर कोई आता रहता है। इससे नवजात को संक्रमण का खतरा रहता है। इसलिए हमें फिर से पुरानी परंपरा का पालन करने पर जोर देना चाहिए।
समय पूर्व पैदा हो रहे 20 फीसदी बच्चे
डॉ. शालिनी त्रिपाठी ने बताया कि प्रदेश में लगभग 10 से 20 प्रतिशत शिशु समय से पहले पैदा होते हैं। 37 हफ्ते से पहले जन्मे बच्चे प्री-टर्म कहलाते हैं। नवजात का वजन 2500 ग्राम से कम नहीं होना चाहिए। 1800 ग्राम से कम वजन वाले शिशुओं को विशेष देखभाल की जरूरत होती है। ऐसे बच्चों की अस्पताल में तो देखभाल हो जाती है, लेकिन घर लौटने के बाद लापरवाही अक्सर भारी पड़ जाती है। अस्पताल से मिली सलाह का पालन न करने के कारण ऐसे लगभग 50 प्रतिशत नवजातों की मृत्यु घर जाने के बाद हो जाती है।
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रेटिना और सुनने की क्षमता की जांच कराएं
डॉ. शालिनी के अनुसार प्री-टर्म और कम वजन वाले बच्चों के लिए नियमित फॉलोअप अत्यंत जरूरी है। इसके साथ ही रेटिना और सुनने की शक्ति की जांच जरूर कराएं।
1800 ग्राम से कम वजन वाले बच्चों के लिए बरतें ये सावधानियां-
- नवजात को अनावश्यक रूप से कोई न छुए
- बाहर से आने पर हाथ साबुन से धोएं या सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें
- जब तक बच्चे का वजन 2500 ग्राम न हो जाए, उसे बाहर न ले जाएं
- बच्चे को न नहलाएं, सिर्फ साफ सूती कपड़े से पोछें
- ठंड से बचाएं, खुली हवा या भीड़भाड़ में न ले जाएं
- केवल और केवल स्तनपान कराएं
- स्तनपान न होने पर मां का दूध निकालकर कटोरी-चम्मच से पिलाएं और कटोरी-चम्मच को 15 मिनट तक उबालकर सुखाएं और फिर इस्तेमाल करें।
-मालिश न करें। इससे संक्रमण और तापमान में गिरावट का खतरा बढ़ता है।
- डॉक्टर द्वारा बताई गई सभी जांच समय पर कराएं
- कोई भी दवा स्वयं न दें
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