लखनऊ। प्रदेश के वन मंत्री के बाद शनिवार को विभाग के प्रमुख सचिव बाघ रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा लेने रहमानखेड़ा पहुंचे। 52 दिन बाद भी बाघ के पकड़े न जाने पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए टीम के अफसरों को फटकार लगाई।
प्रमुख सचिव पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन विभाग अनिल कुमार ने अफसरों के साथ अभियान की गहन समीक्षा की। उन्होंने कहा कि बाघ के अब तक न पकड़े जाने से लगता है कि अभियान सही से नहीं चल रहा है। डीएफओ को बाघ जल्द पकड़ने के निर्देश दिए।
अब तक 17 शिकार कर चुके बाघ की मौजूदगी शनिवार को भी बंशीगढ़ी गांव के पास जंगल में बनी रही। रेस्क्यू ऑपरेशन टीम के लीडर आकाशदीप बधावन ने बताया कि बाघ उस मार्ग की ओर बढ़ रहा है, जिससे यहां तक पहुंचा था। यहां से कुछ दूरी पर गोमती गुजरी है।
बंशीगढ़ी में लगाया गया नया पिंजरा
कॉम्बिंग में शनिवार को बाघ के पगचिह्न रहमानखेड़ा जंगल से आठ किमी दूर बंशीगढ़ी गांव के पास जंगल में मिले। इसके बाद क्षेत्र में टीम ने ट्रैप कैमरा व नया पिंजरा लगवाया। वनकर्मियों, पुलिस व पीएसी जवानों ने बंशीगढ़ी व उसके पास के गांवों गोखौरा, गोपरामऊ, बीघापुर आदि में लोगों को सतर्क किया। अपील की गई कि अकेले घर से न निकलें।
बाघ ने बदला ठिकाना
रहमानखेड़ा के आसपास रहने वालों की मानें तो वन विभाग की गाड़ियों की आवाज से बाघ ने ठिकाना बदल दिया है। वह इलाके से दूरी बनाए है। डीएफओ सितांशु पांडेय ने बताया कि बेल वाले ब्लॉक में गहरे खोदे गए गड्ढे के चारों ओर घूमकर बाघ बंशीगढ़ी की ओर लौट गया।