लखनऊ। बाघ एक बार फिर रहमानखेड़ा जंगल से करीब 15 किमी दूर निकल गया है, जहां उसने बकरी का शिकार किया। हालांकि, वन विभाग की टीम ने बाघ के शिकार करने की पुष्टि नहीं की है। टीम बाघ को जंगल में ही तलाशती रही, लेकिन उन्हें कोई नया पगचिह्न नहीं मिला। बाघ के अब तक न पकड़े जाने से करीब 60 गांवों के ग्रामीण दहशत में हैं।
रहमानखेड़ा संस्थान से 15 किमी दूर दो दिन से बाघ की चहलकदमी बेहलिया गांव व बंशीगढ़ी की तरफ पाई गई है। बाघ ने बंशीगढ़ी निवासी केशव रावत की जंगल में चरने गई बकरी को मार डाला। उसका कुछ मांस भी खाया। बताया जा रहा है कि बाघ ने यह शिकार बुधवार को किया है, लेकिन इस बारे में जानकारी शुक्रवार को सामने आ सकी।
इसी तरह बहेलिया गांव के किसान दीपू रावत ने दावा किया है कि उन्होंने गांव के बाहर अपने ट्यूबवेल से कुछ दूरी पर बुधवार दोपहर करीब तीन बजे बाघ को शिकार का पीछा करते देखा था, जिसके बाद वह दहशत की वजह से ट्यूबवेल में छुप गया। ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी। वन विभाग ने निरीक्षण भी किया, मगर ग्रामीणों का आरोप है कि बाघ के पगचिह्न वनकर्मियों ने मिटा दिए।
इटावा लाइन सफारी के विशेषज्ञ पहुंचे
रहमानखेड़ा में शुक्रवार को बाघ की चहलकदमी नहीं मिली। डीएफओ सितांशु पांडेय, डीएफओ सीतापुर नवीन खंडेवाल व इटावा लाइन सफारी के विशेषज्ञ कार्तिक के साथ टीम ने ट्रैप कैमरे का विश्लेषण किया। इसमें भी बाघ की कोई गतिवधि नहीं मिली। विभिन्न स्थानों पर लगे ट्रैप कैमरे और थर्मल ड्रोन से भी निगरानी की गई। हथिनियों सुलोचना व डायना ने कांबिंग भी की, लेकिन बाघ का पता नहीं चला। वन विभाग की टीम ने गांवों में जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों से सतर्क रहने की अपील की।